★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
भारत की ही तरह से ‘पाकिस्तान’ मे भी मीडिया पर सरकार के पक्ष मे समाचार दिखाने का दबाव बढ़ाया जा चुका है; विरोध करने पर उन्हें विज्ञापन नहीं दिया जायेगा। बहरहाल, पाकिस्तानी सरकार के सिर पर ‘अविश्वास-प्रस्ताव’ की तलवार लटका दी गयी है।
अविश्वास-प्रस्ताव पर इमरान की सत्ता जानेवाली है। जनरल बाजवा ने इमरान ख़ान को २३ मार्च तक सत्ता छोड़कर जाने के लिए एक प्रकार से आदेश जारी कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की संसद् ‘मजलिस-ए-शूरा पाकिस्तान’ मे कुल ३४२ सीटें हैं, जिनमे से २७२ सीधे चुने जाते हैं; ६० सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं तथा १० सीटें अन्य धर्मों के अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित की गयी हैं।
अब जहाँ तक ‘मजलिस-ए-शूरा’ मे इमरान के कुल सांसदों की संख्या की बात है तो कुल ३४२ सांसदों मे से १७९ सांसद इमरान के साथ हैं; विपक्ष के पास १६२ हैं। इमरान ख़ान को बहुमत साबित करने के लिए १७२ सांसद चाहिए, जबकि इमरान के १७९ सांसदों मे से ४० सांसद विद्रोह कर चुके हैं। इस प्रकार विपक्षी दल के १६२ और विद्रोहियों की ४० सांसदों की संख्या को जोड़ लें तो इमरान के विरोध मे कुल २०२ सांसद दिख रहे हैं। ऐसी स्थिति मे, इमरान के लिए अपनी सत्ता बचा पाना सम्भव दिख नहीं रहा है।
इमरान के विरोध मे अविश्वास-प्रस्ताव पारित हो जाने के बाद शाहबाज़ शरीफ़ को पाकिस्तान का नया प्रधानमन्त्री बनाया जा सकता है, ऐसी सम्भावना बनती दिख रही है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २१ मार्च, २०२२ ईसवी।)