डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’
कुछ लोग मंदिर को मदिरालय से
मस्जिद को मय-ख़ाने से
जोड़ गए ।
आस्था से खेला
संवेदनाओं को चक्कर में छोड़ गए ।
और नासमझ मनुष्य
मंदिर से मदिरालय के
मस्जिद से मय-ख़ाने के
रिश्ते पर यकीं कर बैठा ।
डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’
कुछ लोग मंदिर को मदिरालय से
मस्जिद को मय-ख़ाने से
जोड़ गए ।
आस्था से खेला
संवेदनाओं को चक्कर में छोड़ गए ।
और नासमझ मनुष्य
मंदिर से मदिरालय के
मस्जिद से मय-ख़ाने के
रिश्ते पर यकीं कर बैठा ।