तेरी इन झील सी आंखों में, जो ये नूर दिखता है । तेरे चेहरे की मदहोशी में, ये मन चूर दिखता है । कहीं जुल्फों का गिर जाना, कहीं अधरों का खुल जाना । कहीं मासूम चेहरे पर, जरा मुस्कान आ जाना । तूझे यूँ देखकर चंदा भी, अब मजबूर दिखता है ।
तेरी इन …………….
बंद कर लूंँ जो आंखे, तेरी तस्वीर आती है ।
तेरा काजल तेरा झुमका, तेरी बिंदिया सताती है ।
है तेरे मन में क्या, आँखों में सब दस्तूर दिखता है ।
तेरी इन ………………
रची मेंहदी जिन हाथों में, उन्हें चहरे पे मत लाओ ।
हटा दो शर्म का पर्दा, जरा मुखड़ा तो दिखलाओ ।
चाहें जितना छिपाओ तुम, प्यार भरपूर दिखता है ।
तेरी इन……….