इस वर्ष सर्वाधिक बौद्धिक, शैक्षिक, साहित्यिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम करानेवाली संस्था नगर की ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज रही, जिसके तत्त्वावधान में ‘कोरोना-संक्रमणकाल’ में भी आवश्यक अनुशासन का पालन करते हुए, अन्तरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय तथा ज़िलास्तरीय समारोह आयोजन होते रहे।
अपनी प्रेस-विज्ञप्ति में ‘सर्जनपीठ’ के निदेशक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया है कि जनवरी, २०२० से अब तक उनकी संस्था की ओर से कुल ४७ कार्यक्रम कराये जा चुके हैं, जिनमें से तीन सहयोगी संस्था ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ के संयुक्त तत्त्वावधान में कराये गये थे।
‘सर्जनपीठ’ की ओर से कराये गये अन्तरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में ‘हिन्दी के मानकीकरण की समस्या’, प्रमुख रहा। राष्ट्रीय स्तर पर ‘कोरोना-काल में जान जोख़िम उठाकर ख़बरे जुटा रहे हमारे योद्धा’, ‘आज़ादी की क़ीमत हमने पहचानी नहीं’, ‘राजभाषा के नाम पर ‘हिन्दी’ का अपमान’, ‘विषाक्त होती परीक्षाओं और नियुक्तियों की कार्यपद्धतियाँ’, ‘हम अपने भीतर का रावण क्यों नहीं जलाते?’, ‘संवैधानिक संस्थानों और संविधान का दुरुपयोग’, ‘फ़िराक़ गोरखपुरी और उनका जीवन-दर्शन’ तथा अन्य विषयों पर बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किये गये थे। इनके अतिरिक्त ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ नगर की दूसरी संस्था रही, जिसकी ओर से कुल सत्रह कार्यक्रम कराये गये थे। इस संस्था के अध्यक्ष डॉ० प्रदीप चित्रांशी ने बताया कि संस्था की ओर से कविसम्मेलनसहित अनेक विषयों पर कार्यक्रम कराये जा चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि अगले वर्ष ‘सर्जनपीठ’ और उसकी सहयोगी संस्था ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ की ओर से कई महत्त्वपूर्ण आयोजन किये जायेंगे।