‘सर्जनपीठ’ की ओर से अटल बिहारी वाजपेयी को सारस्वत श्रद्धांजलि

“अटल जी मनुष्यता के प्रति अतीव संवेदनशील थे”
इलाहाबाद की बौद्धिक, शैक्षिक, साहित्यिक तथा सांस्कृतिक संस्था ‘सर्जनपीठ’ के तत्त्वावधान में इलाहाबाद में एक मुक्त सारस्वत श्रद्धांजलि-कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ‘राजनीति’ से पृथक् कर, स्मृतिशेष सरस्वती-पुत्र अटलबिहारी वाजपेयी की साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा पत्रकारीय जीवन पर प्रबुद्ध-वर्ग ने अपनी शब्दांजलि अर्पित की थी।

हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के प्रधानमन्त्री ने बताया,” हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से कुरुक्षेत्र में आयोजित कविसम्मेलन में अटल जी ने जिस जीवटता और उत्साह के साथ कविता का पाठ किया था, उसे साक्षी देना, मेरे लिए गौरवपूर्ण रहा। सुषमा स्वराज जी स्वागताध्यक्ष थीं।”
डॉ० रक्षा गोस्वामी के अनुसार, वे एक कुशल वक्ता और संवेदनशील कवि थे तथा जीवन और मृत्यु की आहट को समझने में दक्ष थे।”

ज्योतिर्विद् डॉ० रामनरेश त्रिपाठी ने कहा, “अटल जी भारतीय संस्कृति साहित्य तथा पत्रकारिता के पुरोधा थे। करोड़ों के हृदय में बसनेवाले एक जाज्वल्यमान नक्षत्र का अन्त हो गया।”

संयोजक भाषाविद् डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के अनुसार, अटल जी की शब्दशक्ति में निसर्ग का कोना-कोना झाँकता था। उनकी शिल्पगत संस्कार और वाग्मिता हर किसी को मन्त्रमुग्ध कर लेती थी।”

शिक्षाशास्त्री डॉ० रामकिशोर शर्मा ने कहा, “अटल जी मनुष्यता के प्रति अतीव संवेदनशील थे। उनकी भाषणकला में अद्भुत चुम्बकीय शक्ति थी।”
डॉ० प्रदीप कुमार चित्रांशी ने बताया, “उनका काव्य-सौष्ठव हृदयजीविता से ओत-प्रोत था।”

कवयित्री डॉ० विमला व्यास ने कहा, ” राष्ट्रहित के प्रति उनका चिन्तन सार्थक होता था।”

प्राध्यापक डॉ० सविताकमारी श्रीवास्तव के अनुसार, “उनकी वाणी में अद्भुत प्रकार की ओजस्विता थी।”
प्रतिभा सिंह और नीतू सिंह ने अटल जी को अजातशत्रु-जैसा व्यक्तित्ववाला बताया।

इस अवसर पर श्रीमती निशा पाण्डेय, कर्णिकानाथ, डॉ० सरोज विश्वकर्मा, डॉ० नलिनी यादव, कंजिका पाण्डेय आदिक की समुपस्थिति रही।