लघुत्व (लघुता) से ‘प्रभुत्व’ (प्रभुता) की ओर बढ़ें!

November 20, 2018 0

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय किसी भी विषय में किसी के साथ ‘लिपिर-लिपिर’ नहीं की जाती है। सहजतापूर्वक जब तक पारस्परिक सहमति बनी रहे तब तक एक-दूसरे के साथ ईमानदारी और निष्ठापूर्वक चलते रहना चाहिए; विपरीत स्थिति […]

चिन्तन-अनुचिन्तन

August 4, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अद्वैतवाद जब हृदय-प्रान्त में पहुँचकर भावनाओं के अनुकूल हो जाता है तब ‘रहस्यवाद’ की सृष्टि होती है। यह भाव-धारा जब एकनिष्ठ हो जाती है तब भक्ति के ठोस स्वरूप में परिवर्त्तित हो […]