‘कामायनी’ की काव्य-कमनीयता
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• वस्तुत: आज न तो ‘कामायनी’-सदृश कृती (निष्णात/निपुण) कृतिकार हैँ और न ही अनुभव करनेवाला पाठक-वर्ग है; क्योँकि कविता के नाम पर ‘हृदयजीविता’ की अवहेलना करते हुए, ‘विचारजीविता’ का पालन-पोषण किया […]