कहानी : पश्चात्ताप

December 8, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव, बालामऊ, हरदोई– जिला परिषद के छोटे से विद्यालय में राजेन्द्र सर अपनी सादगी, ईमानदारी और शांत स्वभाव के कारण सबके प्रिय थे। वे कम बोलते थे, लेकिन हर शब्द सच्चाई से […]

प्रेम मे कब किसने मंजिलों को पाया है

September 13, 2025 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’— कभी मत सोचनाकिसी लड़के या आदमी कोचाहा है।हमेशा याद रखनाये अपना दूसरा जिस्मपाया है।जो होना था हुआ जाने दोनये दिनो की आहट को सुनोऔर उन्हें आने दो।प्यार हो या दोस्तीजब […]