सेतुसमुद्रम : धर्म पहले संवाद करता है और युद्ध बाद में

February 5, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समुद्र सामने था—अथाह, गंभीर और चुनौतीपूर्ण। यह वही समुद्र थाजो रावण के अहंकार की सीमा बन चुका था। वानर सेना ठिठकी नहीं,पर प्रश्न था—“कैसे?” राम मौन थे। विभीषण ने सागर से […]

रामायण : रावण-निर्मित भय का उन्मूलन

February 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रावण को किसी ने देखा नहीं था—फिर भी सबने उसे देखा हुआ मान लिया था। किष्किंधा से दक्षिण की ओर बढ़ते वानर-दल के पाँव दृढ़ थे,पर मन अनिश्चित। वन बदलते जा […]