कौन यक़ीन करेगा आख़िर माझी ने ख़ुद नाव डुबोयी
नीलेश सिंह- जब सारी दुनिया थी सोयी जाग रहा था तब भी कोई । उलझा-उलझा है हर कोई कौन करे किसकी दिलजोई । सबकुछ खो बैठी है शायद यूँ रहती है खोयी-खोयी । कौन यक़ीन […]
नीलेश सिंह- जब सारी दुनिया थी सोयी जाग रहा था तब भी कोई । उलझा-उलझा है हर कोई कौन करे किसकी दिलजोई । सबकुछ खो बैठी है शायद यूँ रहती है खोयी-खोयी । कौन यक़ीन […]