दार्शनिक दृष्टिकोण
बहुत ‘पुण्य’ करने पर ही ‘न्याय’ प्राप्त होता है।बहुत ‘न्याय’ करने पर ‘प्रेम’ प्राप्त होता है।बहुत ‘प्रेम करने पर ‘सत्य’ प्राप्त होता है।सत्य ही परम उपलब्धि है। सत्य उपलब्ध होने पर मानव जीवन पूर्णता को […]
बहुत ‘पुण्य’ करने पर ही ‘न्याय’ प्राप्त होता है।बहुत ‘न्याय’ करने पर ‘प्रेम’ प्राप्त होता है।बहुत ‘प्रेम करने पर ‘सत्य’ प्राप्त होता है।सत्य ही परम उपलब्धि है। सत्य उपलब्ध होने पर मानव जीवन पूर्णता को […]
———0 चिन्तन के आयाम 0 ——- —- आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यह विडम्बना ही है कि अद्वैतवादी सिद्धान्त और अभेदमूलक विचार की जन्मभूमि में ही आरम्भ से भेदमूलक समाज रहा है। यहाँ सिद्धान्त और व्यवहार […]