सत्ता और चेतना का संघर्ष

February 16, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चेतना का प्रसार जितना शांत दिखाई देता है, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक होता है। गाँवों में उभर रही नई पद्धति—जहाँ निर्णय सामूहिक होते थे, जहाँ न्याय करुणा के साथ संतुलित […]

विद्या परमं धनम् : भारतीय शास्त्रीय परम्परा में ज्ञान, साधना और लोकहित का दर्शन

February 8, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– “विद्या परमं धनम्।” — यह केवल एक सूक्ति नहीं, अपितु भारतीय सभ्यता की आत्मा है। मानव इतिहास में यदि किसी संस्कृति ने ज्ञान को सत्ता, संपत्ति और सामर्थ्य से ऊपर स्थान […]

The Nature of Love

January 18, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav— The human body is composed of the five great elements—earth, water, air, fire, and ether. In the Indian philosophical tradition, these five are not merely components of the body; they are […]

मैं कर सकता हूँ

December 30, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार राघव– जीवन चाहे जितनी भी परीक्षाएँ ले,कितने ही कठिन मोड़ क्यों न आएँ,बस एक दीप सदैव जलाए रखना—“मैं कर सकता हूँ…मैं आगे बढ़ सकता हूँ…और मेरा विश्वासमुझे वहीं पहुँचाएगाजहाँ मेरी नियति चमकती है।” […]

रोयेगा वो जो अपनी ज़िन्दगी ग़ैर को बनायेगा

December 20, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’– मेरी जिन्दगी की यारों शाम भी अब ढल गयी।क्या से क्या हो गया और किस्मत बदल गयी।स्वप्न मेरे उससे टूटे जो सुबह थी और शाम थी।हाय किस्मत देखिए मुझे गुनहगार बना दिया।मेरे […]

कहानी : पश्चात्ताप

December 8, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव, बालामऊ, हरदोई– जिला परिषद के छोटे से विद्यालय में राजेन्द्र सर अपनी सादगी, ईमानदारी और शांत स्वभाव के कारण सबके प्रिय थे। वे कम बोलते थे, लेकिन हर शब्द सच्चाई से […]

Without dedication no any growth and transformation

November 28, 2025 0

Motivator : Dr. Raghavendra Kumar Raghav– In the heart of the earth, cradled within nutrient-rich soil, a minuscule seed holds the promise of burgeoning into a majestic tree. Just as this seed requires optimal conditions […]

नागवल्ली का मित्रताधर्म

November 16, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार राघव– नागवल्ली का मन आज रासरङ्‌ग में नहीं लग रहा था। रह-रह कर उसे पङ्‌खुड़ी की याद आ रही थी। वह याद कर रही थी कि बाल्यकाल से तरुण होने कभी भी हम […]

Try and try to fly in the sky

November 5, 2025 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Let them praise, or let them blame,The virtuous soul remains the same.Whether poor or crowned with gold,His heart is humble, kind and bold. Once he chooses a righteous way,No fear can […]

Poem : Time is great

August 11, 2025 0

Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– Time is great, so always wait.Fortune comes some time late.When darkness falls you alone,Loved ones leave you to atone.When your shadow left you.When your dears kicked you.Don’t feel bad think […]

अन्तर्मन की आँधी (कहानी)

May 29, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव– कभी-कभी जीवन के सबसे छोटे अनुभव और अनकहे शब्द, हमें इतनी गहरी सीख दे जाते हैं कि वह ताजिंदगी हमारे साथ चलती है। यही कहानी है एक गाँव की, जहाँ एक […]

What is Dharma?

May 18, 2024 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– When someone asks what is Dharma and what it signifies?Say, it’s what we uphold, where true meaning lies.Following it brings us prosperity, freeing us from sorrow.Attaining supreme joy and bliss, into […]

An eternal Sacrificer Bhagat Singh

September 28, 2023 0

Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Speaking the truth, courage immense, Fighting for justice, resilience. For two months, hunger and thirst withstood, Courage to give his life, grand, good. Apart from those who begged for rights, Isolated from […]

जीवन क्या है ? एक बहती हुई नदी

August 26, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवन क्या है ?एक बहती हुई नदी है ।कंकरीले और पथरीले रास्तोंपर बहती हुई,सर्दी और गर्मी सहती हुई।जैसे नदी चलना नहीं छोड़ती है ऐसे ही ये जिन्दगी है ।अनेक रूकावटें और अनेक […]

कविता : दहेज दानव

November 30, 2019 0

कब तक अपनी बहू बेटियाँ चढ़ती रहेंगी बलिवेदी पर । इस दहेज दानव के मुख का कब तक रहें निवाला बनकर ? कब तक इनके पैरों में जकड़ी रहेंगी बेड़ियाँ ? कब तक हम सब […]

मजदूर की जिंदगी

May 27, 2018 0

राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’-  धरती का सीना फाड़ अन्न हम सब उपजाते हैं | मेहनतकश मज़दूर मगर हम भूखे ही मर जाते हैं |   धन की चमक के आगे हम कहीं ठहर न पाते हैं […]

बदलता समय

May 14, 2018 0

राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’- अब तो अपनी शख़्सियत ही इम्तेहान लेती है। हर दिन कुछ न कुछ नयी बात होती है। ज़ेहन में ख़यालात की आंधी बढ़ती चली आती है। विचारों के द्वंद्व में कुछ नयी […]