समाज या राष्ट्र में धार्मिक सह-अस्तित्व उत्पन्न करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि धर्म तो केवल एक होता है
आज अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर आधारित विशेष आर्टिकल “सत्यात्मक न्याय” ही मानवी समाज व मानवी राष्ट्र का एकमात्र धर्म है। संसार मे कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं है जो अपने लिए न्याय न चाहता हो। […]