विद्या परमं धनम् : भारतीय शास्त्रीय परम्परा में ज्ञान, साधना और लोकहित का दर्शन

February 8, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– “विद्या परमं धनम्।” — यह केवल एक सूक्ति नहीं, अपितु भारतीय सभ्यता की आत्मा है। मानव इतिहास में यदि किसी संस्कृति ने ज्ञान को सत्ता, संपत्ति और सामर्थ्य से ऊपर स्थान […]

परिवर्तन की राह

January 11, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– उत्तर प्रदेश के एक गाँव मे बसे एक छोटे से घर मे शिव अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहता था। उसकी जिंदगी मे स्थिरता और सरलता का अनूठा संगम था। हर […]

पारमार्थिक भावना, समय का सदुपयोग और औदार्य: समाज के उत्थान की सच्ची संपदा

November 25, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– मनुष्य के जीवन में अनेक गुण और मूल्य होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ऐसे हैं जो उसे सच्चे अर्थों में महान और समाज के लिए उपयोगी बनाते हैं। इनमें पारमार्थिक […]