लम्हा-दर-लम्हा जो संग-संग चलता रहा, बूढ़ा समझ हम सबने घर से निकाल दिया

January 1, 2018 0

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- एक : लम्हा-दर-लम्हा जो संग-संग चलता रहा, बूढ़ा समझ हम सबने घर से निकाल दिया। दो : कितना निष्ठुर दस्तूर है ज़माने का, काम निकल आने पे घूरे में डाल आते हैं। […]

अर्ज किया है :- दोमुँहे साँपों से बचने की तरकीब आसां नहीं

December 29, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डे-  एक : वह वादाशिकन है, पलकों पे बिठाना मत, गर नज़रों में समायी तो पछतायेगी ज़िन्दगी। दो : ज़िन्दगी भीख में मिला नहीं करती प्यारे! मौत के जबड़े से छुड़ा लेने की […]

अर्ज किया है :- इज़्ज़त ख़रीद कर लाये हैं बाज़ार से कल हम

December 27, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-  १- ”हालात जस-के-तस” मीडिया बताता है, बाहर हो जाने का डर उसे भी सताता है। २- इज़्ज़त ख़रीद कर लाये हैं बाज़ार से कल हम, काना-फूँसी शुरू है, सेंध लगाये पहले कौन। […]

जफ़ापरस्त की उम्र होती है बहुत

December 24, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- एक : खोकर जीने का मज़ा कुछ और ही है यारो! कामयाबी की मनाज़िल (१) यों ही हासिल नहीं होतीं। दो : आँखों में आँसू, लब पे हैं दुवाएँ, इन्तिज़ार उनका, आयें […]