अर्ज किया है :- इज़्ज़त ख़रीद कर लाये हैं बाज़ार से कल हम

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- 


१- ”हालात जस-के-तस” मीडिया बताता है,
बाहर हो जाने का डर उसे भी सताता है।
२- इज़्ज़त ख़रीद कर लाये हैं बाज़ार से कल हम,
काना-फूँसी शुरू है, सेंध लगाये पहले कौन।
३- मान लें, हम कैसे, वह पाक-साफ़ है,
‘कर’ के नाम पर वह तिज़ोरी है भर रहा।
४- वह शातिर है बेहद, इसे जानते हैं सभी,
बात दीगर है, लोग नाम लेने से डरते हैं।
५- अफ़साने को अंजाम तक पहुँचाते नहीं हैं लोग,
फ़साना कहते-सुनते यह ज़माना सो जायेगा |

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय; २६ दिसम्बर, २०१७ ईसवी)