बेटियों की उच्छृंखलता : एक सुलगता हुआ सवाल

June 13, 2025 0

आदित्य त्रिपाठी (सहायक अध्यापक, प्रतापपुर, कोथावाँ)– आज समाज में आये दिन रिश्तों के टूटने की घटनाएँ, घर-परिवार की दरकती दीवारें और स्त्री-पुरुष के बीच पनपती कटुता ने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है। क्या […]

देह के उतार-चढ़ाव के प्रदर्शन की कोई आवश्यकता नहीं

April 29, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’- युगों-युगों से लाज और स्त्री का चोली-दामन सा साथ रहा है, लज्जा तो स्त्री का आभूषण है । भारतीय स्त्री का प्रतिबिम्ब एक स्वर्ण शरीर की मलिका, चंचल, मृगनयनी के समान […]

सगर्व-सहर्ष घोषणा–

July 30, 2021 0

मेरी बहुप्रतीक्षित पाण्डुलिपि ‘नारीचरितमानस’ (समग्र नारी-दर्शन) अब अन्तिम रूप ग्रहण कर चुकी है। एक बार दृष्टि-अनुलेपन करूँगा, तदनन्तर उसे प्रकाशन-प्रक्रियाओं के साथ सम्बद्ध करने पर विचार करूँगा। इसमें भावपक्ष, हृदयपक्ष, विचारपक्ष :– आदर्श और यथार्थ […]

तथाकथित नारी-विमर्श का ‘सच’

June 12, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नारी को जहाँ तक सम्भव है, सब तरह से बाँध कर रखना; पुरुष का एकान्त अनुगत कर देना, यह समाज-व्यवस्था के लिए कार्यकर होने पर भी समाज-जाति की प्रगति के […]