इंसाँ तो मरा हुआ, आँखेँ खुली हुई हैँ

June 28, 2026 0

शिखा यादव– पानी तो बिक रहा है, पवन बिक न जाए;धरती भी बिक रही है, गगन बिक न जाए।अन्तरिक्ष मे भी निगाहेँ हैँ सबकी लगीँ;डर है, सूरज की तपन बिक न जाए।स्वार्थनीति चलते, कोई जगह […]