सूनी हो गई शहर की गलियां, कांटे बन गई बाग की कलियां

February 27, 2024 0

मुझे गीत, गानों, गजलों की ज्यादा समझ नहीं है। सुर, लय, ताल की तो बिल्कुल भी नहीं है। लेकिन मुझे शब्दों की समझ है, शब्दों के प्रभाव की समझ है। मुझे जज्बातों की समझ है, […]