जो राष्ट्रगान का सम्मान नहीं करते बल्कि विरोध करते हैं वे राष्ट्रद्रोही हैं

 राजेंद्र, विश्व संवाद केन्द्र लखनऊ-


राष्ट्रगान पर बहस करना अत्यंत मूर्खता है, समाज में कम से कम दो किस्म के लोग हैं जिसमें एक वे लोग हैं जो अपने माता-पिता को ईश्वर मानते हैं उनकी पूजा करते हैं और पुत्र होने का गौरव समझते हैं यही लोग राष्ट्र गान के महत्व को समझते हुए उसका सम्मान करते हैं, गाते हैं और कभी भी आवाज सुनाई पड़ने पर सावधान की स्थिति में खड़े होकर गाते भी हैं। दूसरे वे लोग हैं जो अपने माता-पिता को एक फैक्ट्री समझते हैं एक प्राकृतिक प्रक्रिया के दौरान अपना निर्माण हुआ मानते हैं वे अपने माता-पिता का कोई अहसान नहीं मानते, माता-पिता ने जो कुछ भी उनके साथ किया है वह उनका फर्ज मानते हैं ऐसे ही लोग राष्ट्र गान का सम्मान नहीं करते, कुछ ऐसे भी लोग हैं जो शंकर वर्ण हैं उन्हे भी राष्ट्र गान का कोई महत्व नही दिखाई देता। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अज्ञानताके कारण राष्ट्र गान का महत्व नहीं समझते। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो राष्ट्र गान का सम्मान नही करते बल्कि विरोध करते हैं वे राष्ट्रद्रोही हैं और देश के दुश्मनों के साथ मिले हुए हैं। इसीलिये कहा गया है कि जो अपने बाप का नहीं है वह राष्ट्र का हो ही नहीं सकता, कुछ लोग यह भी मानते हैं अंग्रेज तो चले गए परन्तु अपनी नाजायज औलादे छोड़ गए ऐसे लोगों से भी राष्ट्रगान के सम्मान एवं गाने की उपेक्षा नही की जा सकती ।