डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

एक अरसे से उत्तरप्रदेश को अपराध की ज़मीन के रूप में देखा जा रहा है; परन्तु जो भी मुख्यमन्त्री रहा, उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिससे अपराध पर नियन्त्रण देखा जाये। हाँ, कुछ सीमा तक मायावती ने अपेक्षाकृत इस क्षेत्र में प्रभावकारी क़दम उठाये थे। अभी हाल ही में कई आपराधिक घटनाएँ सामने आयी हैं :– कुशीनगर में किशोरी के साथ सामूहिक बलात्कार, कानपुर-मद्रस: (मदरसे) में छात्रा के साथ दुष्कर्म, हमीर और जालौन में लड़कियों के साथ बलात्कार और उनकी हत्या, नोएडा में २१ लाख रुपये की लूट, सम्भल में क़ैदियों को ले जा रहे वाहन से भागनेवाले क़ैदियों-द्वारा २ पुलिसकर्मियों की हत्या और अब, सोनभद्र में १३ (१० सरकारी आँकड़ा) निर्दोष आदिवासियों की हत्या की गयी है और २८ (२५ सरकारी आँकड़ा) को घायल किया गया है। इस आपराधिक कृत्य में वहाँ का ग्रामप्रधान मुख्य आरोपित है, जिसमें उसका भाई और उसके गुण्डे भी शामिल हैं।
यहाँ कई प्रश्नों के उत्तर मिलने शेष हैं, जो इस निर्मम घटना की जाँच में सहायक सिद्ध हो सकते हैंं। अब वे प्रश्न हैं :– बिहार के जिस कथित पू्र्व आइ० ए० एस० अधिकारी प्रभात कुमार मिश्र ने भूमाफ़िया ग्राम प्रधान यज्ञदत्त भुर्तिया (गुर्जर) के हाथों ११२ बीघा ज़मीन बेची थी, उसके पास उतनी ज़मीन कहाँ से आयी थी? जिस ग्रामप्रधान ने ३२ ट्रैक्टरों में हथियारबन्द गुण्डों को लाठी-डण्डा, बल्लम-भाला, राइफल, पिस्टल, बन्दूक से लैस कर ‘उम्भा गाँव’ (सोनभद्र) ले आया था, उसे देखते हुए और जघन्य घटना का अनुमान करते हुए भी ज़िलाप्रशासन-पुलिसप्रशासन सोता रहा? २८ निरपराध लोग की नृशंस हत्या की और करायी गयी, जिसे देखकर भी पुलिस मौन क्यों बनी रही? उसके पास ११२ बीघा ज़मीन ख़रीदने के लिए रुपये कहाँ से आ गये? जिस वाहन में ‘हथियारबन्द’ गुण्डे घटनास्थल पर पहुँचे थे, उसकी जानकारी सम्बन्धित थाना के दारोगा को क्यों नहीं हुई थी ? उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ योगी के पास ही गृहमन्त्रालय है, उन्होंने अभी तक कौन-सा क़दम उठाया है? उत्तरप्रदेश पुलिस महानिदेशक की क्या भूमिका रही है? जो लोग एक अरसे से उस ज़मीन पर खेती कर रहे थे, उन्हें उससे वंचित क्यों रखा गया है? निश्चित रूप से उत्तरप्रदेश-शासन-प्रशासन, विशेषत: यहाँ का पुलिस-प्रशासन कहीं से भी स्वच्छ छवि की नहीं है। उत्तरप्रदेश में अपराधी पुलिस से बिलकुल नहीं डर रहे हैं, यद्यपि यहाँ कि पुलिस ग़लत-सही ‘मुठभेड़’ करती आ रही है। जब से आदित्यनाथ योगी मुख्यमन्त्री बने हैं तब से आपराधिक घटनाएँ रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसे में, एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है :– शासन-प्रशासन-स्तर पर कहीं योगी की पकड़ ढीली तो नहीं? बहरहाल, यह निश्चित हो चुका है कि उत्तरप्रदेश-शासन-संचालकों की इच्छाशक्ति और अपने नागरिकों की सुरक्षा करने की नीति और नीयत सन्दिग्ध है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १८ जुलाई, २०१९ ईसवी)