कताई मिल से कमाई गई, अब खाली करवाई जा रही मजदूरों की कालोनियां

संडीला में बंद पड़े सूत कताई मिल का मामला, मिल की बिकी्र का हवाला देकर होटल गिराने पहुंचा कालोनी

                      हरदोई।साहब! रोजी रोटी तो उसी समय चली गई जब हम लोगों के मालिक की ओर से मिल बंद कर दिया गया। लेकिन परिवार के साथ मिल की कालोनियों में रहते थे लेकिन अब उसमे भी नहीं रहने दिया जा रहा है। यह बातें कोई फंसाना नहीं बल्कि संडीला में बंद पड़े कताई मिल में रहने वाले मजदूरों का दर्द है। जिनको मिल की जमीन बिक्री होने का हवाला देकर लखनऊ के चारबाग के एक होटल का मालिक खरीद लिए जाने की बात कहते हुए मजदूरों को मिल से बाहर निकाल रहा है।
                      सोमवार को मिल की कालोनियों में रहने वाले मयंक दीक्षित, ब्रजेश सक्सेना, विद्यादेवी ने बताया कि आज से लगभग 20 वर्ष से पूर्व संडीला में सूत कताई मिल रहा है। जिसमें वह व उनके परिजन मजदूरी करते रहे। लेकिन मिल को बंद कर दिया गया। इसके बाद वह सभी बेरोजगार हो गए। हालांकि कुछ दिन बेरोजगारी का दर्द रहा लेकिन इसके बाद कस्बे में ही कोई ठेला लगाकर तो कोई दुकान कर अपने परिवार की गुजर बसर करने लगा। लेकिन इसके बावजूद मिल उनका सहारा बना रहा। बतातें है कि मिल के खाली पड़े क्वार्टरों में करीब मजदूरों ने अपना आशियाना बना लिया और उसी में रहने लगे। जिससे उनको दर-दर भटकना नहीं पड़ा। लेकिन अभी हाल ही में कालोनियों में रहने वाले लोगों के अनुसार रविवार की शाम लखनऊ के चारबाग में कथित होटल मालिक एके अग्रवाल कालोनियो में शाम को आ धमका और सभी ने कालोनियों को खाली करवाने की बात कही, साथ ही बताया कि अब उसने मिल की जमीन खरीद ली है। इसके बाद कथित आरोपी उनकी कालेानियों में अपने दर्जन भर से अधिक साथियों के साथ घुस और घर में रखे मजदूरों के सामान को तोड़फोड़ करते हुए बाहर फेंक दिया। इसके साथ ही कुछ कालोनियों की दीवारे भी गिरा दी गई। मजदूरों के शोर-शराबा करने पर तमाम लोग भी मौके पर पहुंच गए लेकिन इसके बावजूद आरोपी नहीं माना और मजदूरों के सामान को ट्राली में भरवाकर फरार हो गया। मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की गई है। वहीं हिंदू जागरण मंच की ओर से पीड़ितों की मदद का भरोसा दिया गया है।

मजदूर लड़ रहे हैं मुकदमा

संडीला में बंद पड़े कताई मिल में रहने वाले मजदूरों की माने तो उनका मिल प्रबंधन कमेटी से मुकदमा भी चल रहा है। मजदूरों की शिकायत है कि उनकी मजदूरी अभी भी मिल पर बकाया है। लेकिन उस मुकदमें कोई  हल नहीं निकल रहा है। वहीं मिल मालिक की ओर से मिल को बेंच दिया गया, जिसकी जानकारी उन्हे नहीं मिली है।


जमीन कब्जाने का तरीका गलत

भले ही होटल मालिक की ओर से मजदूरों को मिल की कालोनियों से निकालने की कोशिस की गई हो और उनके सामान को न लूटा गया हो। लेकिन एके अग्रवाल की ओर मिल की जमीन पर इस प्रकार से कब्जा करना बिल्कुल गलत है। अगर उसने जमीन खरीदी भी है तो फिर प्रशासनिक कर्मियों के साथ जाना चाहिए था और नोटिस भेजता। फिलहाल इस घटना से कालोनी में रहने वाले मजदूरों में गुस्सा है। वहीं एसपी ने बताया कि मामला सामने आया है और जांच कराई जाएगी।