उड़ने वाले पङ्ख दो, पिंजरा न दो – अर्चना पाण्डेय

अविचल प्रभा पत्रिका का विमोचन सम्पन्न

भवानीमंडी:- साहित्य संगम संस्थान दिल्ली की अविचल प्रभा संगम सुवास नारी मंच से निकलने वाली मासिक ई पत्रिका है जो तीन वर्षों से छाया सक्सेना प्रभु के प्रबंध संपादन में लगातार साहित्यकारों की रचनाओ को गौरवान्वित कर रही है।

अविचल प्रभा के जनवरी अंक नारी शिक्षा विशेषांक का सम्पादन अर्चना पाण्डेय अर्चना की रचना प्रतापगढ़ द्वारा किया गया। जिसका विषय ज्वलंत विषय नारी उत्थान है जो हमारे समाज के लिए ग्राह्य है । विदित है कि रचनाकार अपनी रागिनी से भावो की मोती बिखराते रहते है और समाज इस मुक्ता को चाहे ग्रहण करे ,चाहे छोड़ दे सभी साहित्यकारों ने मिलकर समाज मे नारी उत्थान पर बल दिया है । डॉ. राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” जी की रचना की चन्द पँक्तियाँ—
“मुझे गर्भ में यूँ न कत्ल करो, मैं भी दुनियां में पहचान बनाना चाहती हूँ। इंदिरा सुनीता विलियम्स सी बनना चाहती हूं।”

नारी शिक्षा से ही राष्ट्रोत्थान है -नवल किशोर सिंह ।

बेटी अबला नही आलम्बन है —–अलका जैन ।

मातृ शिक्षा ही आधार — वंदना नामदेव

ऐसे ही वाक्यों से प्रबल पत्रिका जिसमें छाया सक्सेना ,कुमुद वर्मा भारती वर्मा बौड़ाई, छगन लाल गर्ग , रूपेन्द्र गौर और भी बहुत से साहित्यकारों की रचनाएं शामिल है जिन्होंने समाज से बेटी उत्थान का गुहार लगाई है। पत्रिका की सम्पादिका अर्चना पाण्डेय ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नारी के लिए समाज के सम्मुख शब्द रूपी क्रांति का बिगुल बजाने वाले सभी साहित्यकार बंधुओ का कोटि – कोटि आभार व्यक्त करती हूँ।