बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान एवं महाराष्ट्र-राज्योँ के चार शिक्षालयोँ के-की प्रधानाचार्य एवं हिन्दीविभागाध्यक्ष ने ‘आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ नामक कृति की बड़ी संख्या मे प्रतियोँ का आदेश किया है, जिसके कारण अब कुल एक हज़ार छ: सौ बीस (१,६२०) प्रतियाँ शुद्धाशुद्ध शब्दोँ का बोध करने के प्रति सजग पाठक-पाठिकाओँ के हाथोँ मे पहुँचेँगी। इस संदर्भ मे सर्वाधिक पिछड़ा राज्य ‘उत्तरप्रदेश’ है, जो हिन्दी को ‘बायेँ हाथ का खेल’ समझता आ रहा है; परन्तु इसी राज्य मे हिन्दी-भाषा मे सर्वाधिक विफल विद्यार्थी देखे जाते रहे हैँ और अध्यापक-अध्यापिकावर्ग भी। हमे सर्वाधिक पाठकवर्ग बिहार से प्राप्त हुआ है। देश के कुल राज्योँ मे से उन्नीस राज्योँ का पाठक-पाठिकावर्ग उपर्युक्त पुस्तक का अध्ययन करेगा और अपना भाषिक स्तर उन्नत करेगा, विश्वास है।
अहिन्दीभाषाभाषी राज्योँ मे सिक्किम, मिज़ोरम, त्रिपुरा, मेघालय, आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक, असम, बंगाल, पंजाब एवं अरुणाचलप्रदेश की हिन्दीप्रियता प्रणम्य है।