आइए! ‘भाषिक क्रान्ति’ की दिशा में हम-आप एक पग बढ़ायें।

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


आप यदि किसी के भी सम्प्रेषण में अंकित अशुद्धि/अशुद्धियों के प्रति विश्वस्त हैं तो उसे सुस्पष्ट सचेत कीजिए। उस व्यक्ति को बुरा लगेगा; दोनों के सम्बन्धों में कटुता आयेगी; सम्बन्ध विच्छेद हो जायेगा इत्यादिक चिन्ताओं को परे धकेलते हुए, आप उसके कथन, विचार, कविता आदिक पर दो-टूक प्रतिक्रिया कीजिए। इससे उसे एक दिशा मिलेगी।
सम्बन्ध तो स्वार्थ, मोह, संवेदना तथा भावना का होता है। आइए! और निर्मोही जीवन के प्रवेशद्वार का साँकल खोलिए।