आकाश में पसरते भारतीय पंख : संचार उप-ग्रह जीसैट-6ए का सफल प्रक्षेपण

भारत ने संचार उप-ग्रह जीसैट-6ए का सफल प्रक्षेपण किया है। आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र से आज शाम चार बजकर 56 मिनट पर जीएसएलवी-एमके 2 रॉकेट से इसे अंतरिक्ष में भेजा गया। उपग्रह को भूसमकालिक कक्षा से भूस्‍थिर कक्षा में स्‍थापित किया जाएगा। यह उपग्रह दस वर्ष तक काम करेगा। एक रिपोर्ट-

यह सैटेलाइट एक हाई पावर एस-बैंड संचार उपग्रह है। इस सैटेलाइट में लगा 6 मीटर का कॉम्‍पैक्‍ट एंटीना धरती पर कहीं से भी सैटेलाइट कॉलिंग को आसान बना देगा। दो हजार किलो के इस उपग्रह को बनाने में करीब 270 करोड़ रूपये की लागत आई है। जीसैट-6ए खासतौर पर सेनाओं के बीच दूरस्‍थ स्‍थानों से होने वाली कॉलिंग को आसान बनाएगा. इसरो के अनुसार यह सैटेलाइट जनरल संचार सेवाओं के लिए किसी ट्रांसपॉन्डर क्षमता को नहीं बढ़ाएगा, बल्कि यह उपग्रह खास तौर पर रिमोट एरिया में मौजूद सेनाओं की टुकड़ियों के बीच बेहतर संचार प्रणाली विकसित करने में मददगार होगा। समाचार कक्ष से भूपेंद्र सिंह। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस सफल प्रक्षेपण पर वैज्ञानिकों को बधाई दी है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के अध्‍यक्ष डॉक्‍टर के शिवन ने कहा है कि स्‍वदेशी क्रायोजेनिक इंजन से जीएसएलवी का यह छठा सफल प्रक्षेपण है। उपग्रह के प्रक्षेपण के बाद श्रीहरिकोटा में उन्‍होंने कहा कि इसरो जीएसएलवी उपग्रह विकास कार्यक्रम को जारी रखेगा। इसके अलावा मौजूदा क्रायोजेनिक इंजन को और अधिक शक्तिशाली बनाने के प्रयास किए जाएंगे।