यह कोई सरकारी शिक्षक नहीं हैं। न ही इन्हें गरीब बच्चों को पढ़ाने का पैसा मिलता है। फिर भी रोज सुबह उठकर मोहम्मद शमशुल हसन गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं। लगभग 6 वर्ष से शमसुल ऐसे ही गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।न इसके लिए वह किसी से कोई दान लेते है और न सरकार की तरफ आशा भरी निगाहों से देखते है।वह तो बस बच्चों को आगे बढ़ते देखना चाहते है तभी तो करीब 40 बच्चे इनके पास शिक्षा के साथ संस्कार पाने के लिए आते है और लगन के साथ पढ़कर आगे बढ़ रहे है।
पाली थाना इलाके के असमधा निवासी मोहम्मद शमशुल हसन पुत्र जफरुल हसन को स्नातक करने के बाद काफी मेहनत के बाद भी सरकारी नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने निजी स्कूलों में पढ़ाना शुरू कर दिया लेकिन बात नही बनी तो कुछ समय बाद इन्होंने खेती को अपना पेसा बना लिया।कुछ समय बाद इनके मन मे गरीब बच्चों के लिए पढ़ाने के लिए ख्याल आया और बस वही से इनकी जिंदगी बदल गयी और आज से करीब 6 साल से शुरू हुई इनकी पाठशाला।इन्होंने 6 वर्षों से शिक्षा की अलख जगाने का बीड़ा उठाया हुआ है। वह गाँव के गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं।वह अपने घर के दरवाजे के बाहर ही बच्चों को पढ़ाते हैं।इस समय वह करीब 40 बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
शमसुल की शिक्षा पूरी तरह निःशुल्क है।अब तक यह कई सैकड़ा बच्चों को शिक्षा की ओर बढ़ा चुके हैं। यहां नर्सरी से लेकर कक्षा 8 तक की शिक्षा दी जाती है। शमसुल बताते हैं मुझे बच्चों से बहुत प्यार है इसलिए मैं अपना पूरा समय गरीब बच्चों के बीच देता हूं और इन्हें शिक्षित करता हूं।शमसुल वर्षों से बड़ी मेहनत व लगन से गांव के दर्जनों गरीब बच्चों को अपने घर पर ही निःशुल्क शिक्षा दे रहे हैं।इनका उद्देश्य गांव का कोई भी गरीब नौनिहाल शिक्षा से बंचित न रह जाये।शमशुल का कहना है बच्चों को तालीम देने से उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है।इसके साथ साथ शमशुल को समाज सेवा करना भी पसंद है।किसी भी ग्रामीण की परेशानी में हमेशा आगे आकर उसकी मदद को भी तैयार रहते हैं।यहां ऐसे बच्चे जो काफी गरीब हैं और निजी स्कूलों में नहीं पढ़ सकते हैं या जिनके पास निजी ट्यूशन लेने के लिए पैसे नहीं हैं, वे बड़े आराम से अपनी पढ़ाई निःशुल्क कर सकते हैं। चबूतरे पर खुले में आपको बिल्कुल संयमित तरीके से शिक्षा की लौ जलती नज़र आएगी।