उच्चतम न्यायालय ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी एच लोया की कथित रहस्यमय मौत की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाएं आज खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि जस्टिस लोया के साथ मौजूद न्यायाधीशों के बयानों पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है, जिनमें उन्होंने कहा था कि श्री लोया की मौत स्वाभाविक कारणों से हुई।
शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इन याचिकाओं से स्पष्ट हो गया है कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमले का प्रयास था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण इस मामले में अगम्भीर और पूर्वाग्रह से ग्रसित जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोर्ट के आदेश ने साफ संदेश दिया है कि न्यायपालिका को राजनीतिक बदले की भावना से ग्रसित आरोप का इस्तेमाल कर गुमराह नहीं किया जा सकता है। यह विडम्बना है कि झूठे आरोपों के आधार पर बराबर भारतीय जनता पार्टी, हमारी सरकार और दल के शीर्ष नेताओं को टारगेट करके बदनाम करने की कोशिश की जाती रही है।
वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर पूर्व में लगाए गए आरोप के कारण माफी की मांग की। हम मांग करेंगे कि राहुल गांधी माफी मांगे क्योंकि इस पूरे आन्दोलन में वे बढ़चढ़कर के थे । आज जो भी बात उन्होंने उठाई है, उन सबों का जवाब सुप्रीमकोर्ट ने अपने फैसले में विस्तार से दिया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले में स्वतंत्र जांच के पक्ष में है। गौरतलब है कि जज लोया की मौत का मामला पिछले साल नवंबर के महीने में उस समय चर्चा में आया जब कुछ मीडिया की खबरों उनकी मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया गया था।