आदित्यनाथ योगी! ‘इलाहाबाद’ का नाम नहीं, ‘चरित्र’ बदलिए

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


निर्जीव को बदलकर आपको क्या हासिल? इलाहाबाद का नाम ‘प्रयागराज’ करने से आप ‘इलाहाबाद’ का ‘चरित्र’ नहीं बदल सकते। ‘इतिहास’ क सभी सुधारते आ रहे हैं; परन्तु ‘स्वयं’ को नहीं सुधार पाते और यही भूल आप भी कर रहे हैं। कल्याण सिंह ने इलाहाबाद का नाम ‘प्रयागराज’ किया था; परन्तु कोई अन्तर नहीं पड़ा; अन्तत:, इलाहाबाद ‘इलाहाबाद’ है।

इलाहाबाद का हृदय ‘सुशिक्षित युवा बेरोज़गारवर्ग’ महीनों से नौकरी के लिए आपकी नाक के नीचे लखनऊ में अनशन-आन्दोलनरत है; परन्तु घोर आश्चर्य! उनके भविष्य के विषय के प्रति आप पूर्णत: उदासीन हैं। उत्तरप्रदेश के आगामी विधानसभा-चुनाव में आपके दल और आपके राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला वही युवावर्ग करेगा। आप उनके भविष्य के कृष्णपक्ष को ‘शुक्लपक्ष’ में बदलने के लिए ‘सोच’ तक नहीं रहे हैं। बहरहाल, वही युवावर्ग आपके दल और आपको दिन में तारे दिखाने का काम करेगा; मायावती और अखिलेश की सत्ता कैसे बिखर कर रह गयी थी, इसका अनुभव आपको बहुविध होगा। वह वर्ग कितनी ही कठिनाइयों के बाद भी अपने न्यायिक अधिकार की प्राप्ति के लिए संघर्षरत है।

इलाहाबाद का किसान जी-तोड़ परिश्रम करने के बाद भी आपके शासनकाल में अपना मूल धन भी वापस नहीं पा रहा है। क्यों है ऐसा?

इलाहाबाद की सड़कों के किनारे स्थित जितने भी लोककल्याणकारी वृक्ष थे, उन सबका आपने सफ़ाया करा दिया है।

इलाहाबाद की भाषिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक परम्पराओं का विस्तार करने के लिए, भाषाकारों, साहित्यकारों इत्यादिक के साथ संवाद करने के लिए आपके पास अवकाश तक नहीं है।

इलाहाबाद की रुग्ण स्वास्थ्य और शिक्षा-व्यवस्था को सुधारने के लिए आपकी कौन-सी योजना-परियोजना है, इस पर कभी चिन्तन किया है?

सच तो यह है कि आपको इलाहाबाद की समग्र उन्नति के लिए कोई चिन्ता नहीं है, अन्यथा नाम-परिवर्त्तन के स्थान पर आप स्वास्थ्य-परिवर्त्तन की बात करते। इतना अवश्य है, आपके चिन्तन का यह धरातल ‘रेतीला’ है।


(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २५ मई, २०१८ ई०)