Aditya Tripathi (Managing Editor)-
लखनऊ स्थित बर्लिंगटन चौराहे के निकट चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस आज कथा व्यास श्री शिवाकान्त जी महाराज ने परीक्षित रूपी यजमान को चन्द्र वंश की मनोहर कथा सुनायी ।
कथा के क्रम में जब श्री कृष्ण लीला का वर्णन प्रारंभ हुआ तो परीक्षित जी ने श्री कृष्ण अवतार व उनकी बाल लीलाओं को विस्तार से सुनाने का विशेष आग्रह किया गया । तत्पश्चात महाराज जी ने अपनी रसमयी वाणी में गीत संगीत से भक्ति की त्रिवेणी प्रवाहित करते हुए उपस्थित भक्तों को श्री कृष्ण रंग से सराबोर कर दिया ।
महाराज जी ने नारदजी द्वारा दुरात्मा कंस को कमल पुष्प के माध्यम से भ्रमित कर देवकी की किसी भी सन्तान से उसके विनाश के प्रसंग की कथा का रोचक वर्णन किया गया । मथुरा के कारागार में भगवान श्री कृष्ण के जन्म लेते ही कारागार के एक-एक द्वार के तालों का टूटना और मोहन की मोहिनी से रक्षकों का अचेत हो जाना आदि की कथा का मनोहारी वर्णन किया गया । कथा व्यास श्री शिवाकान्त जी ने संगीतमयी वाणी में बताया कि कैसे घनघोर अँधेरे में मूसलाधार बरसात में अगाध यमुना को कन्हैयालाल के पिता वसुदेव ने पार कर उन्हें गोकुल में अपने मित्र नन्दबाबा के यहाँ पहुँचाया । इसी क्रम में महाराजश्री ने कथा रसिकों को नन्दोत्सव का प्रेम रस पिलाया । महाराज जी की मधुर वाणी में कथा सुनते सुनते मन बृजबिहारी के चरण कमलों में लिपटा हुआ गोकुल में रमण करने लगता है ।
कथा के दौरान परीक्षित रूप में किशन दास अग्रवाल (केडी अग्रवाल) और साथ ही पवन अग्रवाल, अभिषेक अग्रवाल सहित अन्य परिजन उपस्थित रहे ।