कछौना, हरदोई। वर्तमान समय में धान व मक्का की कटाई के बाद बचे अवशेषों में प्रशासन की अनदेखी से किसान धड़ल्ले से आग लगा रहे हैं। पराली के धुएं से हवा की सेहत बिगड़ने लगी है। ग्रामीणों ने आंखों में जलन की शिकायत की। वहीं बुजुर्ग लोगों की सांस की समस्या बढ़ गई।
प्रशासन ने पराली जलाने से होने वाले नुकसान मद्देनजर पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके लिए गांव-गांव कृषि विभाग पराली का उपयोग हेतु जागरूकता गोष्ठी की गई। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ० रामेन्द्र सिंह ने किसानों से अपील की, आप गौ-आश्रय स्थलों को चारे हेतु पराली दे दे, बदले में वहां से गोबर की खाद प्राप्त कर लें। उप कृषि निदेशक डॉ० नंदकिशोर ने बताया राष्ट्रीय हरित अधिकरण के क्रम फसल अवशेष में आग लगाना दंडनीय अपराध है। पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। मिट्टी के उर्वरक शक्ति पर प्रतिकूल असर पड़ता है। लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो जाता है। राजस्व टीम द्वारा जियो टैगिंग के माध्यम से निरीक्षण किया जा रहा है। पराली जलाने वाले किसानों को चिन्हित कर ठोस कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता