माइनर की कई वर्षों से नहीं हटायी गयी सिल्ट, नाले के नाली बनने से किसान हलाकान

कछौना (हरदोई) : वर्तमान समय में किसानों की फसल की सिंचाई व पलेवा होना है। विकास खण्ड कछौना के अंतर्गत शारदा नहर से बघौली माइनर रजबहा के किलोमीटर 7.642 पटरी दायीं ओर से निकला है। इस माइनर से दर्जनों ग्राम बरवा सरसण्ड, सुक्खी खेड़ा, गनेशपुर, मतुआ, बनियन खेड़ा, त्यौरी, मोहाई आदि ग्रामों के किसानों की सिंचाई का मुख्य साधन हैं। परन्तु वर्तमान समय में किसानों की रबी, सरसों, आलू व अन्य फसलों की बुवाई के लिए पलेवा होने को हैं। परंतु विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों की शिथिलता के कारण इस माइनर कि कई वर्षों से सिल्ट की सफाई नहीं हुई है। माइनर में घास व जंगल झाड़ी ही खड़ी है। वहीं कई वर्षों से सफाई न होने के चलते यह संकीर्ण होकर नाली के रूप का हो गया है। पटरी भी खराब हो गई है। इस पर स्थित पुलिया भी टूट चुकी है।

कोरोना महामारी ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। वहीं माइनर होने के बावजूद उसमें पानी न आने के से किसानों के सामने सिंचाई व पलेवा करने का संकट खड़ा हो गया है। वहीं किसानों ने बताया कुछ किसानों के पास निजी संसाधन हैं। जिनसे वह सिंचाई व पलेवा कर लेते हैं परंतु ज्यादातर सीमांत किसानों के पास सिंचाई का संसाधन नहीं है। कोरोना महामारी के कारण उनकी आर्थिक हालत काफी खराब है। सूदखोरों से ब्याज पर रुपए लेकर किसी प्रकार से खेतों की बुवाई करनी है। माइनर की टेल तक सिल्ट सफाई की शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी व अवर अभियंता फर्जी आख्या लगाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री करके किसानों को गुमराह कर देते हैं।

किसान कमलाकांत ने बताया बघौली माइनर में सिल्ट की सफाई न होने के कारण निजी संसाधनों व किराए पर सिंचाई करनी पड़ती है। खेतों के बगल से ही माइनर निकला है, परन्तु इसका लाभ नहीं मिल पाता है। किसान संदीप कुमार ने बताया विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों की खाऊ कमाऊ नीति के कारण कई वर्षों से उक्त माइनर की सफाई नहीं कराई गई है। दर्जनों बार प्रार्थना पत्र दिए गए हैं। सिंचाई विभाग को अन्नदाता की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। किसान भैयालाल ने बताया इस समय गेहूं, मसूर, सरसों, आलू की बुवाई के लिए पलेवा होनी हैं, लेकिन बघौली माइनर की सफाई न होने से इसमें भारी मात्रा में सिल्ट जमी हुई है। पानी न आने से किसानों को सिंचाई करने में परेशानी हो रही है।

किसान नफीस ने बताया माइनर में बूंद भी पानी नहीं है, इससे गेहूं, लाही, मसूर, आलू की बुवाई के लिए खेतों में पलेवा के लिए पानी कई वर्षों से नहीं मिल पाता है। इस कारण पंपिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ती है। किसान रामशरण ने बताया चुनाव के समय नेता जाति, धर्म व लच्छेदार किसानों के हित की बातें करके वोट ले लेते हैं। वोट लेने के बाद देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले अन्नदाता की तरफ कोई ध्यान नहीं देता है।

अवर अभियंता दिलीप कुमार यादव ने बताया नहर बंद हो चुकी हैं। धनराशि मिलने पर माइनर की सफाई करा दी जाएगी। किसानों द्वारा लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।

रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता