अंग्रेजों की यातना में सिंचित, मैं वही अनुराग हूँ ।
वीरों के ऊष्ण लहू से भींगा, मैं जलियाँवाला बाग हूँ ।।
13 अप्रैल भारत के पंजाब प्रान्त का अमृतसर गोलियों की तड़तड़ाहट और मासूम लोगों की चीखों से गूँज उठा।
बैसाखी त्यौहार के पर्व पर पूरे देश में मातम छा गया।
भारत के इतिहास का एक ऐसा काण्ड जिसने अंग्रेजी सरकार का क्रूर चेहरा सभी के सामने उजागर कर दिया।
एक ऐसी घटना जिसने भारतियों को एकजुट राजनीति के लिए प्रेरित किया और जिसका परिणाम भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति के आंदोलनों को और मजबूत कर दिया।
13 अप्रैल 1919 भारत के इतिहास का एक ऐसा काला दिन जिस दिन अंग्रेजी हुकूमत द्वारा की गयी एक बेहद ही कायराना और क्रूर हरकत जिसे आज हम जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के नाम से याद करते है। आज उसी वीभत्स हत्याकांड की 130वीं बरसी है।
18 मार्च 1919 को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा एक कानून लागू किया गया जिसे रॉलेट एक्ट का नाम दिया गया। ये कानून सर सिडनी रौलेट की अध्यक्षता वाली सेडिशन समिति की सिफारिशों के आधार पर बनाया गया था। इस कानून को बनाने के पीछे ब्रटिश सरकार की यह मंशा थी भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचला जा सके।
इतिहास के पन्नो को पलटें तो यह बात पता चलती है कि कैसे महात्मा गांधी ने रॉलेट एक्ट के ख़िलाफ़ देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था, जिसके बाद मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में देश कई हिस्सों में बड़े पैमाने प्रदर्शन हुए। उसी क्रम में 13 अप्रैल 1919 बैशाखी वाले दिन पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग मे एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया जो अंग्रेजी हुकूमत को रास नहीं आयी और अंग्रेजी हुकुमत के अधिकार जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण ही उस सभा पर गोलियाँ चलवा नरसंहार करवा दिया। जिसमें 400 से अधिक व्यक्ति मरे और 2000 से अधिक घायल हुए।
अनाधिकारिक आंकड़ों की माने तो इस पूरे हत्याकाण्ड में 1000 से अधिक लोग मरे थे और 2000 के करीब लोग घायल हुए थे।
ब्रिटिश शासन के समय लिखे गए अभिलेखों में इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार की गयी है। जिनमें से 337 पुरुष, 41 नाबालिग लड़के और एक 6-सप्ताह का बच्चा भी था।
इस पूरे हत्याकाण्ड में शहीद होने वाले लोगों के पुख्ता आंकड़े किसी के पास भी नहीं उपलब्ध हैं। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है।
1997 में महारानी एलिजाबेथ अपने भारत दौरे के दौरान जलियाँवाला पर बने स्मारक पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी और सन् 2013 ईसवी में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। कैमरॉन ने विजिटर्स बुक में लिखा कि “यह ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी”।
—अवनीश मिश्रा