बदनामी पर चादर ओढ़ाने के लिए सी० बी० एस० ई० का दो चरणो मे पुनर्मूल्यांकन-प्रक्रिया कराने का फ़ैसला

सी० बी० एस० ई०-परीक्षाकाण्ड– पाँच और अन्तिम

अन्तत:, तमाम लीपा-पोती और ना-नुकुर के बाद जब विद्यार्थियोँ और अभिभावकोँ ने अखण्डनीय प्रमाण सार्वजनिक किये तब सी० बी० एस० ई० और शिक्षामन्त्रालय को मानना पड़ा है कि सी० बी० एस० ई० परीक्षा– २०२६ की डिज़िटल परीक्षण-प्रक्रियाओँ मे लापरवाही बरती गयी है। अब देशभर मे व्याप्त काक्रोच जनता पार्टी के लाखोँ सदस्य-सदस्याओँ, बोर्ड की छात्र-छात्राओँ और उनके अभिभावकोँ का बढ़ता आक्रोश देश के शिक्षामन्त्री धर्मेन्द्र प्रधान के लिए बहुत ही भारी पड़ता दिख रहा है; बावुजूद प्रधान की नैतिकता बेअसर है, अन्यथा अपने पद का त्याग करते हुए, प्रायश्चित्त कर लेते। नीट का पाप भी उन्हीँ के मत्थे लगा है। अब सुलगती हुई ख़बर निकलकर आयी है कि शिक्षामन्त्रालय आन्तरिक जाँच कराने मे जुटा है, जिससे आशंका बढ़ गयी है कि लापरवाह अधिकारियोँ पर गाज़ गिर सकती है।

आश्चर्य का विषय है कि बोर्ड विद्यार्थियोँ और अभिभावकोँ की ओर से लगाये गये आरोपोँ को पूरी तरह से सही नहीँ मान रहा है। यही कारण है कि अब तक लगाये गये चार आरोपोँ मे से मात्र दो को सही माना है; शेष ढुलमुला दिया हैँ।

अब उन आरोपोँ और बोर्ड की ओर से दी गयी सफ़ाई और स्वीकारोक्ति को समझेँ–
पहला आरोप :– दिल्ली के वेदान्त श्रीवास्तव का आरोप है कि पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल से डाउनलोड की गयी भौतिकविज्ञान की उत्तरपुस्तिका उसकी थी ही नहीँ।
सफ़ाई :– सी० बी० एस० ई० ने माना कि प्रौद्योगिक-त्रुटि के कारण वेदान्त के भौतिकविज्ञान की अनुपयुक्त उत्तरपुस्तिका डाउनलोड हो गयी थी।
दूसरा आरोप :– जब पोर्टल पर दिख रहीँ, उत्तरपुस्तिकाओँ की सामग्री इतनी धुँधली थी कि पढ़ना मुश्किल था, फिर परीक्षकोँ ने अंक कैसे दे दिये थे?
सफ़ाई :– उत्तरपुस्तिकाओँ की सामग्री सुस्पष्ट न होने, डुप्लिकेट एण्ट्री के कारण लगभग ३० उत्तरपर्णियाँ हटा ली गयी थीँ। बोर्ड ने विरोध के बाद पुनर्मूल्यांकन के लिए कई बार तारीख़ेँ बढ़ायीँ और शुल्क घटायी थी।
आरोप :– १७ वर्षीय सार्थक सिद्धान्त ने आरोपित किया है :– बोर्ड ने हैदराबाद की एजेंसी कोएम्प्ट एडु० टेक्० को लाभ पहुँचाने के लिए नियम क्योँ बदले थे?
सफ़ाई :– निविदा पूरी तरह से सरकारी नियमो का पालन करते हुए आवण्टित किया गया था।
आरोप :– कुछ साइबर-विशेषज्ञोँ का आरोप है कि बोर्ड की डिज़िटल परीक्षा-प्रणाली बिलकुल सुरक्षित नहीँ है।
सफ़ाई :– डिज़िटल-प्रणाली की जाँच के लिए आइ० आइ० टी०, मद्रास और कानपुर के संचालकोँ से सम्पर्क किया गया है।

उक्त अक्षम्य घटना के पश्चात् से बोर्ड ने इस वर्ष उत्तरपुस्तिका-परीक्षण से सम्बन्धित प्रक्रियाओँ मे बदलाव किया है, जोकि दो चरणो मे बाँटा गया है :– प्रथम चरण के अन्तर्गत विद्यार्थी बोर्ड-पोर्टल पर जाकर अपनी उत्तर-पुस्तिका की प्रतिलिपि देख सकते हैँ और शिकायत दर्ज़ कर सकते हैँ। द्वितीय चरण के अन्तर्गत विद्यार्थी उत्तरपर्णी मे सम्भावित त्रुटियोँ के लिए आवेदन कर सकते हैँ और यदि उन्हेँ लगता है कि उन्हेँ अनुचित अंक दिये गये हैँ तो अपने उत्तर के पुनर्मूल्यांकन की माँग भी कर सकते हैँ, जिसके लिए १ जून से ६ जून की तारीख़ नियत है। बोर्ड ने इस प्रक्रिया मे शर्त भी लगा दी है; और वह यह कि पुनर्मूल्यांकन और अंक-सत्यापन के लिए वही विद्यार्थी पात्र होँगे, जिन्होँने प्रथम चरण मे अपनी उत्तरपर्णी की प्रतिलिपि वा स्कैन की गयी प्रति के लिए आवेदन किया था। बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन और अंक-सत्यापन से सम्बन्धित किसी प्रकार की शंका का समाधान करने के लिए हेल्पलाइन और ई० मेल की सुविधा प्रदान की है।

वास्तव मे, इस बार बोर्ड की मूल्यांकन-प्रक्रिया अनियमितता का शिकार बनी रही। परीक्षाफल के प्रसारित होने बाद विद्यार्थियोँ और अभिभावकोँ ने कम अंक, अपूर्ण और अनुचित परीक्षण और मूल्यांकन, पोर्टल से सम्बन्धित कठिनाई आदिक पर आपत्ति की थी। उसी बीच, विद्यार्थियोँ ने अपनी-अपनी उत्तरपुस्तिका देखने के लिए आवेदन कर दिया था। बोर्ड ने बताया है कि ४ लाख से अधिक विद्यार्थियोँ ने उत्तरपुस्तिका देखने के लिए आवेदन किया था, जबकि ११ लाख से अधिक उत्तरपुस्तिकाओँ की माँग की गयी थी।

अब समझते हैँ कि विद्यार्थी अपनी उत्तरपुस्तिकाओँ का समुचित मूल्यांकन कैसे करेँगे।
सर्वप्रथम विद्यार्थियोँ को अपने प्रश्नपत्र की मार्किंग स्कीम डाउनलोड करना होगा, जो बोर्ड की वेबसाइट पर प्रश्नपत्र के साथ उपलब्ध रहेगी।

उसके पश्चात् विद्यार्थी अपनी उत्तरपुस्तिका मे दिख रहे उत्तरोँ का मिलान मार्किंग स्कीम से करेँगे। यदि किसी प्रश्न का उपयुक्त उत्तर दिये जाने के बावुजूद अंक न दिया गया हो वा किसी उत्तर का परीक्षण न किया गया हो तो विद्यार्थी उसे अलग से लिख सकते हैँ। आवेदन करते समय यह बताना अनिवार्य है कि अमुक प्रश्न मे अमुक प्रकार की त्रुटि है, जिससेकि बोर्ड उसपर उचित काररवाई करे।

बोर्ड ने जो सूचना प्रसारित की है, उसके अनुसार, उत्तरपुस्तिका-पुनर्परीक्षण के लिए ₹५०० और पुनर्मूल्यांकन-हेतु प्रति प्रश्न ₹१०० देय हैँ। यदि अंक मे वृद्धि होती है तो सम्बन्धित शुल्क लौटाये जा सकते हैँ।
विद्यार्थियोँ को अपनी उत्तरपुस्तिका मे देखने होँगे :–
● सभी उत्तरोँ के परीक्षण किये गये हैँ वा नहीँ।
● उत्तरपुस्तिका का कोई पन्ना ग़ायब तो नहीँ हुआ है।
● किसी उत्तर को बिना जाँचे छोड़ा तो नहीँ गया है।
यदि किसी उत्तर के लिए कम अंक दिये गये होँ तो उसी प्रश्न के पुनर्मूल्यांकन-हेतु आवेदन किया जा सकता है। ध्यान रहे– पुनर्मूल्यांकन के समय अंक घट सकते हैँ और बढ़ भी वा फिर पहले-जैसे ही रह सकते हैँ। पुनर्परीक्षण के बाद प्रसारित किये गये अंक ही अन्तिम रूप से मान्य होँगे।


सी० बी० एस० ई० परीक्षा-काण्ड : तबसे अब तक
● ५ दिसम्बर– बदनाम एजेंसी कोएम्प्ट एडु० टेक्० को परीक्षा कराने का ठीका दिया गया था।
● १३ मई– बारहवीँ बोर्ड की परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया।
१९ मई– विद्यार्थियोँ की शिकायतोँ का निबटारा करने के लिए पोर्टल-सुविधा दी गयी; परन्तु पहले दिन ही प्रौद्योगिक-त्रुटि के कारण पोर्टल
ठप्प हो गया था।
२२ मई– उत्तरपर्णी की प्रतिलिपि उपलब्ध कराने के लिए तारीख़ बढ़ायी गयी।
२५ मई– पोर्टल को सुधारने के लिए देश के दो आइ० आइ० टी-विशेषज्ञोँ से सहायता माँगी गयी।
१ जून– पोर्टल पुन: निष्क्रिय बना रहा।
१ जून– शिक्षामन्त्रालय ने कोएम्प्ट को निविदा दिये जाने और ओ० एस० एम० की विफलता को लेकर सी० बी० एस० ई० से रिपोर्ट माँगी है।
२ जून– बोर्ड ने पोर्टल को सजीव करने की घोषणा की थी, जो ६ जून तक खुला रहेगा।
२ जून– दिल्ली उच्चन्यायालय मे याचिका प्रस्तुत करते हुए, यह माँग की गयी है कि जिन विद्यार्थियोँ को कम अंक दिये गये हैँ, उन्हेँ अतिरिक्त अंक दिये जायेँ; साथ ही पोर्टल की सुविधा एक माह के लिए बढ़ायी जाये।

२ जून– शिक्षामन्त्रालय ने ओ० एस० एम० से सम्बन्धित निविदा-प्रक्रियाओँ मे कथित अनियमितताओँ और डिज़िटल मूल्यांकन-प्रणाली मे सामने आयी विसंगति को लेकर आन्तरिक स्तर पर जाँच शुरू करा दी है।

अब इस परीक्षा-कलंककथा को लेकर शिक्षामन्त्रालय की कुम्भकर्णी नीद खुली है। इसका कारण भी है कि शिक्षामन्त्रालय के अन्तर्गत आनेवाले सी० बी० एस० ई० की कार्यशैली की सर्वत्र थू-थू हो रही है और प्रकरण न्यायालय मे भी पहुँचा दिया गया है।

(समाप्त)