(भाषाविज्ञानी और समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की कठोर आपत्ति)
पिछले १२ जून को उत्तरप्रदेश पी० सी० एस० (प्रा०) परीक्षा के सामान्य हिन्दी/हिन्दीभाषा-खण्ड के अन्तर्गत प्रश्नपत्र मे कुल २० प्रश्न किये गये थे, जिनमे से अधिकतर के प्रश्नात्मक वाक्य अशुद्ध रहे। ऐसा लगता है, मानो किसी नौसिखिए व्यक्ति ने प्रश्नपत्र तैयार किया हो।

भाषाविज्ञानी और समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने अपना क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है– अशुद्धतापूर्वक प्रश्नपत्र तैयार करनेवालों को दण्डित करना होगा, ताकि ऐसे आपराधिक कृत्यों की लगातार की जा रही पुनरावृत्ति पर नियन्त्रण किया जा सके।
उन्होंने यह भी बताया है कि उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग-सचिव जगदीश के ह्वाट्सऐप पर पिछले बार की समीक्षा-अधिकारी की परीक्षा मे अशुद्धियों की जानकारी दी थी; परन्तु उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया कि इसमे कोई दो मत नहीं कि जिस किसी ने भी इस प्रश्नपत्र मे दिये गये प्रश्नो, अवतरण और उनसे सम्बन्धित प्रश्नो आदिक के लेखन किये हैं, उसे हिन्दी-व्याकरण की बिलकुल समझ नहीं है। यद्यपि उसने पी० सी० एस० के प्रश्नपत्र तैयार किये हैं तथापि वह छठी कक्षा के हिन्दी-व्याकरण से भी अनभिज्ञ है। उसे ‘विरामचिह्नों’ की समझ है ही नहीं। यही कारण है कि ‘उपविरामचिह्न’ (:) का प्रयोग प्रश्नात्मक वाक्य मे किया गया है। इतना ही नहीं, हर बार की तरह इस परीक्षा मे भी ‘विवरणचिह्न’ (:–) की पूरी तरह से उपेक्षा की गयी है, परिणामत: प्रश्नसंख्या १ से ५, ८, १२, १४, १५, १६, १७ तथा १८ के अन्त मे जहाँ ‘विवरणचिह्न’ लगाना चाहिए था, वहाँ सादा छोड़ दिया गया है। प्रश्न ७ के सभी विकल्पात्मक वाक्य अशुद्ध हैं; क्योंकि वाक्यान्त मे ‘पूर्ण विरामचिह्न’ (।) का प्रयोग ही नहीं किया गया है।आचार्य ने प्रश्न ७ के ही अन्तर्गत अशुद्धियों से भरपूर दिख रहे अवतरण के अशुद्ध शब्दप्रयोग, विरामचिह्नादिक मे संशोधन किये हैं, जो इस प्रकार हैं:– “हम, एक-दूसरे करते हैं, बावजूद क्योंकि उसके करते हैं, हम कर रहे हैं करते हैं, जिसकी नहीं है; लेकिन प्रकट करते हैं, मानो वह एकमात्र सत्य हो। लेते हैं; क्योंकि हममे से अधिकतर लोग की स्थिति “मुँह… और” (b) करते हैं, जिसकी (c) रह ही नहीं सकते।”
आचार्य ने इस तथ्य का खुलासा करते हुए बताया– हमारे परीक्षार्थियों को निर्देश किया जाता है कि अपठित-पठित के लिए उपयुक्त शीर्षक एक शब्द का ही सर्वोत्तम माना जाता है; परन्तु इस अवतरण का शीर्षक पाँच शब्दों का बना दिया गया है; और वह भी व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है। वह शीर्षक है, ‘पाखंड आधुनिक जीवन का सत्य’, जबकि केवल ‘पाखण्ड’ शब्द पर्याप्त था; क्योंकि कोई भी पाखण्ड ‘आधुनिक जीवन का सत्य’ मानकर ही किया जाता है। यदि इसे लिखना ही था तो लिखा जाता– ‘पाखण्ड : आधुनिक जीवन का सत्य’। ‘प्रश्न ११ के वाक्यान्त मे ‘निर्देशकचिह्न’ (—) का प्रयोग होगा। इतना ही नहीं, इस प्रश्न के सभी विकल्प पूर्ण वाक्यवाले हैं, इसलिए सभी के अन्त मे ‘पूर्ण विरामचिह्न’ (।) का प्रयोग किया जाना चाहिए था।
जागरूक भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ से उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग के परीक्षा-विभाग से सम्बन्धित निरंकुश अधिकारियों के विरुद्ध कठोर काररवाई की माँग की है।