● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
बिहार की राजनैतिक अँगड़ाई ‘राजनीतिक पण्डितों’ को एक बार फिर से चौंका सकती है। लालू पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था और जाँच की लपट उन तक पहुँचनेवाली ही थी कि उसके पहले ही उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को रातोंरात मुख्यमन्त्री बना दिया था।
तेजस्वी यादव पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं, इसलिए वे बिहार के स्वयं उपमुख्यमन्त्री न बनकर, अपनी पत्नी ‘राजश्री’ को बिहार का उपमुख्यमन्त्री बनाना पसन्द करेंगे।
‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ अपने पालतू तन्त्र ‘ई० डी०’ और ‘सी० बी० आइ०’ का दुरुपयोग करने के लिए ‘विश्व-विश्रुत’ हो चुकी है; लेकिन नीतीश भी कम चतुर और चालाक खिलाड़ी नहीं हैं। वे भा० ज० पा० को कई बार ‘धोबियापाट’-दाँव लगाकर चित्त कर चुके हैं। सावन-मनभावन नीतीश के साथ इस तरह से जुड़ चुका है, जिस तरह से चोली-दामन एक-दूसरे को छोड़ नहीं पाते। आपको स्मरण होगा कि इससे पहले सावन-महीने मे ही नीतीश कुमार ने भा० ज० पा० को “टाटा-बाय-बाय” कह दिया था।
नीतीश राष्ट्रीय जनता दल और काँग्रेस का संग-साथ पाकर अब पहले से अधिक मज़्बूत हो चुके हैं। भविष्य मे यदि नीतीशकुमार उक्त दलों के साथ घोषित गठबन्धन करके चुनाव लड़ते हैं तो भारतीय जनता पार्टी का बिहार से अस्तित्व समाप्त माना जायेगा। वैसे नीतीश कुमार के दल ‘जनता दल (युनाइटेड)’ के साथ सात राजनीतिक दल जुड़ चुके हैं और लगभग १६४ विधायक उनके साथ हैं।
इतना तो तय है, एन० डी० ए०-रहित राज्य-सरकारों को अस्थिर करने मे ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ ने कोई क़सर नहीं छोड़ी है; परन्तु बिहार मे उसकी दाल गलनेवाली नहीं है; क्योंकि नीतीश ने ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ के धुर विरोधी दलों के साथ हाथ मिला लिये हैं।
● चित्र-विवरण– राजश्री
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ९ अगस्त, २०२२ ईसवी।)