रचनाकार– डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।
ओ! भोले हमारे, ओ! शिव जी हमारे।
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
सब तेरे सहारे हैं, तेरी दया पे निर्भर,
सब भक्त तुम्हारे हैं, जपते हैं हर-हर।
तेरी कृपा के चातक केवल तुझे निहारे,
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
ओ! भोले हमारे, ओ! शिव जी हमारे,
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
जो भी सबको भाता, जग तुमसे पाता,
हे आशुतोष रामेश्वर, सबसे तेरा नाता।
दुनिया में सब सुलभ है तेरे नाम के सहारे,
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
जब मन घबराए, तम घोर घिर के आए,
तेरी जटा से गंगा बन आशा बह जाए।
त्रिशूलपाणि संकट संहारक हारे के सहारे,
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
नीलकंठ दीनदयाल, विष पीकर जग पाला,
जग के दुःख निवारण को घोर हलाहल पी डाला ।
हम भी तेरे चरणों में नत हैं काटो कष्ट हमारे,
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
डमरू की धुन सुनकर मिटते भय के अँधियारे,
तेरे तांडव से काँपे पापी दुष्ट और राक्षस सारे।
भस्म रमाए तन पर भोले, सारे जग के उजियारे।
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
कैलाशपति शंभु, करुणा के सिंधु हो,
निर्बल के बलदाता शिवजी, भक्तों के बंधु हो।
जो शरण तुम्हारी आए, उसे भव से आप उतारें।
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
नंदी के संग बैठे, जग के रखवाले,
माँ गौरा के स्वामी, दीनों के रखवाले।
तेरी कृपा से खिलते सूने मन के द्वारे,
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
औघड़दानी बाबा, सुन लो विनती मेरी,
भक्ति रहे अटल बस अरदास यही मेरी।
जनम-जनम तक गाऊँ नाम तुम्हारा प्यारे,
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।
ओ! भोले हमारे, ओ! शिव जी हमारे,
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।
हर-हर महादेव की ध्वनि सारे जग को तारे,
तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।