नीट-घोटाला– एक
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
इन दिनो जिस परीक्षा की सर्वाधिक चर्चा की जा रही है, वह ‘नीट’ है, जिसे एन० ई० ई० टी०/रा० पा० प्र० प० (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश-परीक्षा; N.E.E.T. = National Eligibility cum Entrance Test) कहते हैँ। यह परीक्षा मेडिकल कॉलेजोँ मे एम० बी० बी० एस०, बी० डी० एस० एवं अन्य मेडिकल-शाखाओँ मे प्रवेश पाने के लिए आयोजित की जाती है। इसके अतिरिक्त इंजीनियरिंग शिक्षण-संस्थानो, विशेषकर एन० आइ० टी०, आइ० आइ० आइ० टी० एवं अन्य प्रौद्योगिकी-संस्थानो मे प्रवेश पाने के लिए यह परीक्षा आयोजित करायी जाती है। जे० ई० ई० एडवान्स्ड के लिए पात्रता अर्जित करने के लिए मार्ग जे० ई० ई० मुख्य से ही होकर जाता है।
पहले इन और अन्य परीक्षाओँ का आयोजन विभिन्न संस्थानो की ओर से कराया जाता था; परन्तु परीक्षाओँ का समय पर पारदर्शिता के साथ परीक्षाओँ को न करा पाना तथा उचित समय पर परिणाम दे पाना सम्भव नहीँ हो पाता था, इसलिए केन्द्र-सरकार ने एक एजेंसी एन० टी० ए० = नेशनल टेस्टिंग एजेन्सी (राष्ट्रीय परीक्षा एजेन्सी) का गठन किया था, जिसके ऊपर अब बदनामी और बेईमानी का गहरा दाग़ लग चुका है, जिसके लिए वह एजेंसी और सरकार समान रूप से उत्तरदायी हैँ। वर्ष २०१७ मे गठित एन० टी० ए० पहले मानव संसाधन विकास मन्त्रालय के अन्तर्गत काम करती थी; अब वह शिक्षा-मन्त्रालय के अन्तर्गत कार्य कर रही है। यद्यपि उसका गठन देशभर मे आयोजित की जानेवाली प्रवेश-परीक्षाओँ को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से किया गया था तथापि काफ़ी समय से उसकी विश्वसनीयता पर ग्रहण लग चुका है।
वह संस्था परीक्षा-केन्द्रोँ का चयन करती है; प्रवेशपत्र को ऑन-लाइन-पद्धति से उपलब्ध कराती है; उत्तर-कुंजी प्रसारित करती है; निर्धारित अवधि मे परिणाम प्रसारित करती है तथा छात्र-छात्राओँ की समस्या का निराकरण करने के लिए ‘हेल्पलाइन नम्बर’ प्रसारित करती है।
छात्र-छात्राओँ को परीक्षा-केन्द्रोँ की दूरी, सर्वर-डाउन की समस्या, प्रौद्योगिकी-अनियमितता, प्रश्नपत्र-लीक आदिक की समस्याओँ का सामना करना पड़ता है।
इतने सारे वैधानिक और पारदर्शी चोँचलोँ को धत्ता बताते हुए, जिस तरह से पर्चा-लीक करने-कराने मे माहिर और शातिर गुटोँ ने हमारे देश के २२ लाख छात्र-छात्राओँ के भविष्य पर ग्रहण लगा दिया है, उससे सरकार की तत्परता और सजगता पर भी कई प्रकार के प्रश्नचिह्न खड़े कर दिये हैँ। ऐसा पहली बार नहीँ हुआ है कि इसे संयोग वा दुर्योग कहकर क्षमा किया जा सकता है। नीट– २०२४ का भी पर्चा-लीक हुआ था और २०२५ की परीक्षा की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठाये गये थे। नीट– २०२४-२०२५ की परीक्षाओँ मे एक ही परिवार के चार विद्यार्थियोँ का चयन कराया गया था, जिनमे से दो (बेटा-बेटी) भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी माँगीलाल बिवाल के थे और दो बेटियाँ उसके भाई घनश्याम बिवाल की थीँ, जो मर चुका है। उन सबका विवरण इसप्रकार है :–
१– विकास बिवाल पुत्र माँगीलाल बिवाल– सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज २– प्रगति बिवाल पुत्री माँगीलाल बिवाल– दौसा मेडिकल कॉलेज ३– दिव्य बिवाल– पुत्र स्वर्गीय घनश्याम बिवाल– एस० एम० एस० मेडिकल कॉलेज, जयपुर ४– सानिया बिवाल– पुत्री स्वर्गीय घनश्याम बिवाल– बॉम्बे मेडिकल कॉलेज। इस विवरण का शर्मनाक पहलू यह है कि माँगीलाल बिवाल उन्हीँ दो आरोपितोँ मे से एक है, जिसे वर्तमान नीट प्रश्नपत्र-लीक के प्रकरण मे दिनेश बिवाल के साथ गिरिफ़्तार किया गया है। स्वर्गीय घनश्याम बिवाल आरोपित माँगीलाल बिवाल का बड़ा भाई बताया जा रहा है। दूसरे शब्दोँ मे– वर्ष २०२४-२०२५ की भी नीट-परीक्षा के प्रश्नपत्र बेचे गये थे। बदनाम सरकारी एजेंसी ‘एन० टी० ए०’ ने ५ मई, २०२४ ई० को नीट-यू० जी०-परीक्षा आयोजित की थी; परन्तु परीक्षा-समाप्ति के कुछ ही घण्टे के भीतर सोसल मीडिया पर प्रश्नपत्र-लीक होने के आरोप लगाये गये थे। पेपर-आउट कराकर उपर्युक्त चार भाजपाई बेटे-बेटियोँ के चयन कराये गये था; तब प्रश्नपत्र ₹ ३० से ५० लाख तक मे बेचे गये थे, जिसका परिणाम रहा कि छात्र-छात्राओँ के पूर्णांक ७२० मे से ७२० प्राप्तांक रहे। उक्त विवाद शान्त होने के स्थान पर जब और विस्तार पाने लगा तब १,५६३ छात्र-छात्राओँ को कृपांक दे दिये गये। ऐसे मे, कई छात्र-छात्राओँ को ७१८ और ७१९ अंक दिये गये थे, जो किसी रूप मे व्यावहारिक नहीँ था। जब उक्त अवैध कृत्य का प्रकरण उच्चतम न्यायालय मे लाया गया था तब मोदी-सरकार और एन० टी० ए० ने न्यायालय मे एक शपथपत्र प्रस्तुत कर, प्रश्नपत्र के व्यापक स्तर पर लीक होने को ग़लत बताया था, जिसका परिणाम हुआ था कि उच्चतम न्यायालय ने मोदी-सरकार का साथ देते हुए, उस प्रश्नपत्र को स्थानीय स्तर पर लीक होने के तर्क को स्वीकार कर, पूरी परीक्षा निरस्त करने से मना कर दिया था, यद्यपि उच्च न्यायालय ने यह माना कि परीक्षा की पवित्रता भंग हो चुकी है, फिर भी परीक्षा दुबारा नहीँ हुई थी। पहले तो शिक्षामन्त्री धर्मेन्द्र प्रधान प्रश्नपत्र-लीक होने की बात को एक सिरे से ख़ारिज़ करके समय व्यर्थ करते दिख रहे थे। १३ जून, २०२४ ई० को प्रधान ने सुस्पष्ट कर दिया था– नीट-परीक्षा मे पेपर-लीक के कोई सुबूत नहीँ मिले हैँ। इसके साथ ही उन्होँने एन० टी० ए० को भी बेदाग़ घोषित करते हुए छात्र-छात्राओँ के असंतोष और विरोध को ‘साज़िश’ की संज्ञा दे दी थी और कोचिंग-केन्द्रोँ पर विरोधियोँ का साथ देने का ठीकरा फोड़ दिया था। मोदी-सरकार भी नहीँ मानती थी कि प्रश्नपत्र लीक हुआ था। आश्चर्य होता है कि तब उच्चतम न्यायालय के सम्बद्ध न्यायमूर्तियोँ को यह बात समझ मे नहीँ आयी थी कि प्रश्नपत्र का लीक होने का अर्थ था कि वह प्रश्नपत्र जाने कहाँ-कहाँ बेचा गया होगा। यहाँ यह भी विचारणीय है कि मोदी-सरकार की अन्यायप्रियता और उच्चतम न्यायालय की ओर से बरती गयी लापरवाही का ही परिणाम है कि उक्त बिसवाल-परिवार ने वर्ष २०२६ की नीट-परीक्षा मे भी प्रश्नपत्र ख़रीदा था।
परीक्षा-घोटालोँ पर एक नज़र
● वर्ष २०१५ से २०२६ तक– १४८ परीक्षा-घोटाले।
● ८७ परीक्षाएँ निरस्त; ९ करोड़ छात्र-छात्राओँ का भविष्य अनिश्चित।
● १४८ घोटालोँ मे सिर्फ़ एक को सज़ा दी गयी थी।
● नीट ए० आइ० पी० एम० टी० एवं अन्य मेडिकल-परीक्षाओँ मे १५ घोटाले मिले।
● सी० बी० आइ० ने १७ और प्रवर्तन निदेशालय (ई० डी०) ने ११ प्रकरण की जाँच की थी; परन्तु सारे आरोपित बेदाग़ रहे।
यदि सारे आरोपित गिरिफ़्तार कर लिये गये रहते तो कदाचित् नीट– २०२६ का भी प्रश्नपत्र परीक्षा होने से पहले सार्वजनिक नहीँ होता; क्योँकि जिन लोग ने वर्ष २०२५ के नीट कराये जाने से पहले प्रश्नपत्र-लीक करवा लिये थे, वर्ष २०२६ के नीट के प्रश्नपत्र ख़रीद लेने मे कामयाब हो गये थे और अपने परिवार के बेटे-बेटियोँ को परीक्षा मे पात्रता दिला दिये और सरकार की राष्ट्रीय परीक्षा-समिति ठगी-की-ठगी रह गयी थी।
(कल पढ़ेँगे– ‘नीट– २०२६ प्रश्नपत्र-लीक होता रहा और ‘एन० टी० ए०’ सोती रही!..?)