जीवन का असली धर्मशास्त्र है यथार्थगीता :- परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज

भवानीमंडी:- यथार्थ गीता के प्रणेता स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने कहा है कि भगवान का भजन किये बिना मनुष्य का कल्याण नहीं होने वाला। भजन किसी एक शब्द के रूप में भी हो सकता है। जप के रूप में भी हो सकता है और ईश्वर की महत्ता का गान करने वाले पद भी हो सकते है।

स्वामी जी रविवार को समाने घाट स्थित त्रिदेव धाम में आयोजित सत्संग में प्रवचन कर रहे थे। सन्त कबीर के दोहे की पंक्ति ‘सुमिरि सनेह सों राम जाको नाम’ की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि राम नाम का मर्म समझने के लिए उस शब्द को भी भजन रूप में अपने अंदर उतारना होगा।उसे ही स्नेह पूर्वक याद करना होगा। वही राम कल्याणक है। वही राम उद्धारक है। वही राम तारक है और वही राम हमारी तृष्णा का संहारक भी है। जीवन का असली धर्मशास्त्र गीता ही है। सन्त नारद महाराज, तानसेन महाराज, सोहम महाराज, लाले महाराज, स्वामी वरिष्ठानंद,स्वामी ब्रह्मानंद, जयराम बाबा और मोती बाबा उपस्थित हुए।