प्रयाग का विलक्षण आध्यात्मिक वैभव

January 14, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• “सितासिते तु ये स्नाता माघमासे युधिष्ठिर,न तेषां पुनरावृत्ति: कल्पकोटि शतैरपि।”‘तीर्थराज’ प्रयाग की महत्ता को समझें :―“त्रिवेणी माधवं सामं भरद्वाज च वासुकिम्।वन्दे अक्षयवटं शेषं प्रयागं तीर्थ नायकम्।।” बाबा तुलसी ने प्रयाग […]

प्रयाग का विलक्षण आध्यात्मिक वैभव

January 14, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रयाग (इलाहाबाद) मे तीर्थयात्रियों का गमनागमन (‘आवागमन’ अशुद्ध है।) आरम्भ हो चुका है। इन दिनो ‘माघ मेला’ की आध्यात्मिक उत्सवधर्मिता के साथ सभी तीर्थयात्री सम्बद्ध हो गये हैं। सुदूर अंचलों […]

चिन्तन की समय-सत्य कड़ी

May 20, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मनसा-वाचा-कर्मणा परिशुद्ध मनुष्य को कोई पसन्द नहीं करता; क्योंकि वह प्रत्येक सत्य को ‘सत्य’ के साथ निर्लिप्त भाव के साथ कहता है; उसके कथन और कर्म में कोई भेद नहीं […]

डॉ० रामनरेश त्रिपाठी के रूप में ‘अध्यात्मज्ञान’ का एक स्तम्भ ढहा!

May 3, 2021 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इधर, कुछ दिनों के भीतर ही प्रयागराज के अनेक क्षेत्रों में यशस्विता के साथ कर्म करनेवाले हस्ताक्षर इस संसार से जा चुके हैं। उसी शृंखला में आज (३ मई) अध्यात्म, […]

‘आनन्द’ क्या है?

August 24, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हृदय में जब न ‘हर्ष’ हो और न ही ‘विषाद’ तब की स्थिति ‘आनन्द’ है। ऐसी मनोदशा ‘स्थितिप्रज्ञ’ की कोटि के अन्तर्गत रेखांकित होती है। एक वास्तविक संन्यासी (कदाचित् यत्र-तत्र […]

जीवन का असली धर्मशास्त्र है यथार्थगीता :- परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज

September 9, 2019 0

भवानीमंडी:- यथार्थ गीता के प्रणेता स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने कहा है कि भगवान का भजन किये बिना मनुष्य का कल्याण नहीं होने वाला। भजन किसी एक शब्द के रूप में भी हो सकता है। […]