सशक्तीकरण केवल ज्ञान, जागरूकता, उच्च चरित्र, अच्छी संस्कृति और से ही आ सकता है : सैयद अहमद खान

बदायूं : सर सैयद डे के अवसर पर नगर स्थित आरफीन लान में एक सेमिनार का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता मजहर अली ने की । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व न्यायाधीश बी डी नकवी रहे । इसके अलावा कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री देवराज जी ए0डी0जे0 व आशुतोष शर्मा ए0डी0जे0 रहे ।

कार्यक्रम का आगाज़ कुरान के पवित्र पाठ से हम्माद इम्तियाज ने किया । इसके बाद कक्षा 12 के छात्र रितेश शंखधर ने संस्कृत में नात प्रस्तुत की । कार्यक्रम में मौजूद डॉक्टर इत्तेहाद आलम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम में आए सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इसमें कोई दोराय नहीं कि सैयद अहमद खान उस दौर के सबसे ज़हीन इंसानों में से एक थे । गणित, चिकित्सा और साहित्य कई विषयों में वो पारंगत थे । कहा जाता है कि जहां भी उनका तबादला होता था, वहां वो स्कूल खोल देते थे । मुरादाबाद में उन्होंने पहले मदरसा खोला, पर जब उन्हें लगा कि अंग्रेजी और विज्ञान पढ़े बिना काम नहीं चलेगा तो उन्होंने मुस्लिम बच्चों को मॉडर्न एजुकेशन देने के लिए स्कूलों की स्थापना की । उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सर सैयद अहमद खान का बहुत बड़ा योगदान है । इसको कभी भुलाया नहीं जा सकता । इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद विशिष्ट अतिथि आशुतोष शर्मा ने कहा कि सर सैयद अहमद खान ने जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कायम की है वह एक अच्छाई की कर्मभूमि है । हमें उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं से सीख लेना चाहिए । इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद देवराज जी ने कहा कि हमें अलीगढ़ की तहजीब ही बताती है कि एक दूसरे से मिल जुल कर रहना चाहिए और आपस में भेदभाव नहीं करना चाहिए ।

इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद सलीमुद्दीन एडवोकेट एवं डॉक्टर मोहम्मद यूसुफ द्वारा भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और सर सैयद अहमद खान की यादें साझा की । इस मौके पर उपस्थित फारिया आलम ने भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की शिक्षाओं और सर सैयद अहमद खान की जीवन पर रोशनी डाली । कार्यक्रम के आखिर में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बी डी नकवी पूर्व न्यायाधीश ने सर सैयद अहमद खान के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक सर सैयद अहमद खान सबसे करिश्माई और दूरदर्शी व्यक्ति के रूप में उभरे और विश्व पटल पर उनकी एक अलग पहचान बन गयी । उन्होंने भारतीय समाज विशेष रूप से भारतीय मुस्लिम समुदाय के लिए आधुनिक शिक्षा की आवश्यकता को महसूस किया । सर सैयद अहमद खान यह बात अच्छी तरह जान चुके थे कि सशक्तीकरण केवल ज्ञान, जागरूकता, उच्च चरित्र, अच्छी संस्कृति और सामाजिक पहचान से ही आ सकता है । यही कारण है कि सर सैयद अहमद खान ने लोगों को पारंपरिक शिक्षा के स्थान पर आधुनिक ज्ञान हासिल करने के लिए प्रेरित किया । क्योंकि वह जानते थे कि आधुनिक शिक्षा के बिना प्रगति संभव नहीं है ।

कार्यक्रम के आखिर में सलमान अहमद ने कार्यक्रम में आए सभी लोगों का आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम का संचालन अहमद मुस्तफा ने किया । इस मौके पर मुख्य रूप से फखरे अहमद सोबी, डॉ सारिक जनाब खान, डॉक्टर इलतेफात हुसैन, डॉक्टर सवीह खान, मोहम्मद शारिक अम्बर आदि उपस्थित रहे ।