पुस्तक समीक्षा, कृति:- एक दिया उम्मीद का


कवयित्री:- दीपाली पांडेय” दीया”
प्रकाशक:- साहित्य संगम संस्थान प्रकाशन इंदौर मध्यप्रदेश
मूल्य :- 100/-
पृष्ठ:- 40
समीक्षक:- *राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित’*
( राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी)

प्रस्तुत काव्य संकलन साहित्य जगत की स्वर कोकिला उभरती कवयित्री दीपाली पांडेय दीया की सुन्दर कृति है। अल्पायु में ही दीपाली ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य जगत में अपनी अलग ही पहचान बनाई है। इतनी छोटी सी उम्र में छन्दों का ज्ञान होना उन पर ईश्वर की विशेष कृपा से संभव हुआ है। आराध्य पर उनका पूर्ण विश्वास है।दीपाली ने बड़े बड़े मंचों पर काव्य पाठ किया है । कई मंच साझा किए हैं। राष्ट्रीय स्तर के कवि कवयित्रियों के सानिध्य में आप मधुर स्वर में गीत ग़ज़ल प्रस्तुत कर अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में श्रोताओ को मन्त्र मुग्ध कर देती है। आपकी आवाज में गजब की मिठास है।

एक दिया उम्मीद का कृति के प्रबंध संपादक छन्दाचार्य आदरणीय शेलेन्द्र खरे सोम जी,निर्देशक राजवीर सिंह मन्त्र,और कृति का सम्पादन किया है आदरणीय आशीष पांडेय जी ने।
अपने शुभकामना संदेश में सोम जी लिखते हैं कई छन्दों में निबद्ध एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत कृति में है। छोटी सी उम्र में अपार काव्य प्रतिभा माँ वीणा ने अनुजा को सौंपी है।

आशीष पांडेय जी लिखते हैं यह पुस्तक इसके नाम के अनुरूप कवयित्री के मन मे किसी उम्मीद के दिये कि ओर इशारा कर रही है।इतनी कम उम्र में इतनी उत्तम रचनाओं से सुसज्जित अनुपम भावों से परिपूर्ण छंदबद्ध रचनाओं का सृजन पुस्तक रूप में किया गया है।

मीना भट्ट जी लिखती है साहित्य के प्रति इनकी निष्ठा प्रशंसनीय है। लेखनी सशक्त है। कम उम्र में साहित्य जगत में अच्छी पहचान बनाई है। दोहा चोपाई गीत कुंडलियां कविताएं आदि प्रस्तुत कृति में है।

राजवीर सिंह मन्त्र लिखते है प्रस्तुत कृति एक छन्द काव्य है। छन्दों का संकलन है। दीपाली के जन्मोत्सव पर अनूठा उपहार है। कैलाश मण्डलोई कदम्ब लिखते हैं उमंग उत्साह जुनून कवयित्री में है। अरुण श्रीवास्तव लिखते हैं कविता के इंद्रधनुषी रंग बिखरे हैं। गागर में सागर भर दिया है। भाव के साथ संवेदना करुणा,रिश्तों की महक,भविष्य की संभावना इस कृति की विशेषता है।

B छाया सक्सेना जी लिखती है मन भावन काव्य संग्रह है।शिल्प के प्रति सजगता है।समाज मे व्याप्त समस्याओ पर आधारित रचनाएँ है। अल्पायु में ही काव्य साधना की है। साहित्य जगत में ऊंचा मुकाम पाएं ऐसी कामना की गई है।

शिव स्तुति में भगवान शिव के रूप का मनोहारी वर्णन किया है। चोपाई गीतिका में व्यक्ति को दीपक की लो की तरह ऊँचा उठने की प्रेरणा देती रचना है । आप लिखती है दीपक की लो बनकर जीना रोशन करना है जग सारा।
चोपाई गीतिका विनती दीया की है रामा सच्चा रिश्ता सदा निभाऊं रिश्ते सच हो । कवयित्री रिश्ते निभाने का संकल्प लेती है। आजकल रिश्ते टूट रहे हैं।रिश्तों में अपनापन नहीं मिलता।

मेहंदी मनहरण घनाक्षरी में हिना की महक आने लगती है। मेहंदी श्रृंगार में खास मानी जाती है। शुभ शकुन त्योहार विवाह के समय मेहंदी बनाई जाती है हाथों को बेलबूटों से सजाया जाता है। पिया के नाम की मेहंदी जीवन भर याद रहती है। सावन की अल्हड़ मस्ती व मेहंदी हाथों की गजब का संयोग। मेहंदी के बूते रंग इसमें अनूठे। सावन में आज टूटे हाथों में लगाना है।

लावणी छन्द में एक डित उम्मीद का में मन के आंगन में उम्मीद के दिये कि रोशनी कुछ यूं नज़र आती है। दीया बनकर उम्मीदों का बैठी गम के अंधियारे। राह दिखाओ है प्रभु मुझको बैठी हूँ द्वार तुम्हारे। सत्यमेव जयते के दोहे बहुत अच्छे लगे। सत्य जीतता है सदा, भले झूठ में जान। सत्यमेव जयते कहूँ मेरी है पहचान। यथार्थ में सच की जीत होती है । बेटी की विनती में बेटी पढ़ाओ की थीम को उजागर करती रचना सामयिक लगी। ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों को पढ़ने नहीं भेजते है। सभी के मन मे बेटी को पढ़ने देना चाहिए ये भाव पैदा करने के उद्देश्य से लिखी रचना की पंक्तियाँ देखिये:- बेटी बनकर जन्म ली खुशियां अपरंपार। ऐसा वर भगवन दिया,देखे सब संसार।

देश की ज्वलंत समस्या भ्रष्टाचार हरिहरण घनाक्षरी में रिश्वत न लेना न कभी देने की नसीहत दी है। जनता को सावधान किया है।भ्रष्टाचार मिटाने के लिए सामूहिक प्रयास की बात कही है। आप लिखती है। रिश्वत न लेना तुम नेक काम करो तुम। अन्याय से डरो तुम भ्रष्टाचार मिटाना है। देश मे भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो गई है कवयित्री की चिंता नहीं ये तो हम सब की चिंता का विषय है।

किसान ताटंक छन्द,स्वार्थी ताटंक छन्द, सिपाही ताटंक छन्द, तेरी यादें मधुशाला आदि इस कृति की प्रमुख रचनाएँ हैं। चुनाव प्रकृति और मानव पर आधारित विषयों को लेकर कुंडलियां छंद में कवयित्री ने प्रकति बचाने की बात कही। पहली बार युवा मतदाता मतदान करने जाता है उसे ये पता नहीं होता कि कौन सोपान चढ़ेगा।

कवयित्री कहती है। ” पहली बात चुनाव में करना है मतदान । समझ नहीं आये मुझे कौन चढ़े सोपान।। प्रकति पर आधारित रचना में आप लिखती है”मानव ने फिर ले लिया दानव का अवतार प्रकृति विचारी रो रही करके हाहाकार।
प्रथम गुरु माँ होती है। माँ ही आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। ज्ञान दिया सम्मान दिया है। हर पल मुझ में मान दिया।
दीया कुंडलियां टूटे टूटे स्वप्न नहीं जीवन मे अब रस। रोशन की थी चाह आज पर दीया बेबस।।

षजीवन मे प्रसन्नता मन प्रसन्न होने से आती है । पर्यावरण पर आधारित दोहे विभिन्न विषयों पर लिखे गए हैं पेड़ नदियां कोयल वायु प्रदूषण वन्य जीव,खग,धरा ताप पर शानदार लिखा है। सबको जगाने का काम किया है। आज प्रदूषण से बुरा हाल है। वायु प्रदूषित हो रही तनिक न आती लाज। ठंडी हवा अब बहे अब पृथ्वी सजाई है।

मित्रता की महिमा में सुदामा ओर कृष्ण जैसे मित्र आज नहीं मिलते। लेकिन मित्रता कैसी होनी चाहिए । मित्र वही जो संकट के समय मदद कर दे। आजकल स्वार्थ के लिए लोग मित्र बना कर धोखा कर रहे हैं। प्यार हो गया ग़ज़ल के शेर एक से बढ़कर एक उम्दा है। पूरी हुई है ख्वाइशें तुझको जो निभाया। अब मेटि जिंदगी का तू हार हो गया है। प्यार समर्पण का दूसरा नाम है।

जुगनू दोहे लिखकर संदेश दिया कि हमें जीवन मे अंधेरो से लड़ना चाहिए। छोटी छोटी बाधाओं से कभी घबराना नहीं चाहिए। वे लिखती है अंधकार से लड़ रहा करता उसका नाश। दिखने में छोटा दिखे लेकिन करे प्रकाश।

नारी के सिर गागर दोहावल में पनिहारिन का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया है। हस्त वक्ष सिर बगल में गागर का सुंदर वर्णन किया है। मधुमाला छन्द में सरसों के खेत मानों धरती माँ ने पीली ओढ़नी ओढ़ ली हो। भाइयों में धन दौलत की लड़ाई होना आदि बातें आपने रखी है। बड़ा कठिन है इस दुनियां में दर्द भरा जीवन जीना। राह दिखा प्रभु ऐसी मुझको मंजिल तक लेकर जाए।

दोहे प्रयास शीर्षक से आपने बताया कु निरंतर प्रयासरत रहने वाले को सफलता जरूर मिलती है। प्रयास से कुछ भी मिले,रखना तुम संभाल।मंजिल हो या तजुर्बा चीज़ है बेमिसाल। कर्मभाग्य शीर्षक के दोहे भी कर्म करने की प्रेरणा देते हैं। गीता में भी निष्काम कर्म करने की कहा है। कवयित्री कहती है” कर्म करो मिलकर सभी छोड़ो फल की आस। नहिं बढ़कर कुछ भाग्य से अब तुम्हारे पास। मनुष्य भाग्य का स्वयं निर्माता है। भाग्य में कुछ लिखा नहीं होता है।
आल्हा छन्द भी श्रेष्ठ लिखा। सौंदर्य मनहरण घनाक्षरी में नख शिख सौंदर्य का लाजवाब वर्णन किया है। सौंदर्य से भरपूर लगती है कोहिनूर।पति को करे ये चूर, अदा दिखलाती है।

माँ की ममता, दोहे भाई के, बचपन की बातें मेहनत , श्रम दोहे , मुक्तक वर्षा ऋतु के व इंसानियत पर कुण्डलिया अच्छी लगी। दोहा गीत में काली अवतार व माँ काली के अवतार की महिमा का विशेष गान मन को सुकून देता है।

महादेव पर पैर रख, माता रोय अपार। पूजे जिसको जग सदा, वह काली अवतार।।
काजल सी ये काली रातें सजनी देख डराती हैं। यहां अमावस रात में जाने, कैसे वह सो पाती है।

काली रातो का सुंदर वर्णन किया है। स्कूल चलें हम हरिहरण घनाक्षरी में ऐसे स्कूल की बात कही है जहां लोभ पाप से बचने की बात बताई जाती हो। जीवन निर्माण की जहाँ शिक्षा दी जाती हो। कवयित्री कहती हैं “लोभ पाप से बचाएं ऐसी शिक्षा सिखलाये नाम हम कर जाए ज्ञान ऐसा हमें मिलें।

गर्मी, नूतन वर्ष सैनिक मां की ममता विषयों पर दिल को छू गए। गर्मी का मौसम हो तो क्या हाल होता है। धरती जलती तवा समान। ऐसा ही कुछ लिखती है दीपाली जी”गर्मी बढ़ती जा रही हुआ हाल बेहाल।धरती सारी अब तपे, ग्रीष्म बना है काल। राजस्थान के मरु प्रदेश की गर्मी असहनीय होती है।

मैं पढ़ने को आई शीर्षक से लिखी कविता बालिका शिक्षा की ज्योति जगाने में सक्षम है। मैं पढ़ने की चाह लिए मन मे एक उल्लास लिए।ढेर किताबें लाई हूँ बेटी बनकर आई हूँ। ऐसी बेटियों का समाज को स्वागत करना चाहिए। बेटियों को पढ़ाना चाहिए। उन्हें मान मिले सम्मान मिले ऐसा प्रयास हो।

इस कृति में तीन मुक्तक मुझे बहुत पसंद आये जिनमे एक है” कभी काजल लगाती है कभी बिंदिया सजाती है।जरा सा पास आकर के हमेशा भाग जाती है। अदा उसकी सभी देखो सितारों की चमक फैली। न जाने कोनसी हवाएं संग लाती है । ईश्वर से काल्पनिक संवाद में समय का महत्व बताया है। हमें समय अनुसार सब मिलता जाता है। थोड़ा धैर्यवान बनना होगा। ईश्वर कहता है मैं समय आने पर फल अवश्य देता हूँ। मुक्तक “रोती वसुंधरा आज कह रही वृक्ष हमारी शान सुनो। इनको मत काटो हे मानव मेरा अभिमान सुनो।वन्य जीव सब खोते जाते सूख रही सारी नदियां। नहीं रही पेड़ों की छाया, खग भी हो बेजान सुनो।

आज वन्य जीव कम होते जा रहे हैं। जंगल कटते जा रहे हैं। पेड़ अंधाधुंध काटे जा रहे है। धरती का तापमान बढ़ना। भूकम्प अतिवृष्टि अनावृष्टि आदि हो रहे हैं। कवयित्री ने पर्यावरण प्रदूषण की जंगल व वन्य जीवों को बचाने की बात कहती है।

मेरा गांव काव्य रचना ग्राम्य संस्कृति की याद दिलाती है। गांवों का शुद्ध वातावरण। खेतों में फसलें लहलहाती। पनिहारिन पनघट पर पानी भरती। झूलों में झूलना। चौपालों पर सुख दुख की लंबी लम्बी बाते । ये सब आज भी हमारे भारत के गांवों में मौजूद है।

दीपाली जी का ये कविता संग्रह उनकी उम्मीदों को अवश्य पूरा करेगा। यह कृति साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान दिलाएगा। इसी कामना के साथ कवयित्री पांडेय को शुभ आशीर्वाद। आप ऐसे ही कालजयी रचनाएँ लिखती रहो।

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