★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
कृति ‘जो झुका नहीं’ संस्मरण-प्रधान है, जिसका नामकरण समयसापेक्षहै। इसके कृतिकार अपने समय के प्रतिष्ठित पत्रकार अग्रज-सम कृष्णमोहन अग्रवाल जी हैं, जो अपने पत्रकारिता के स्वर्णिम काल में ‘के० एम० अग्रवाल’ के नाम से विश्रुत रहे।
कल (१५ नवम्बर) ‘जो झुका नहीं’ संस्मरणात्मक कृति उस व्यक्ति को हस्तगत हुई थी, जो आज तक किसी के भी सम्मुख ‘झुका नहीं’ है; टूटा अवश्य हो; किन्तु बिखरा नहीं।
अग्रज श्रद्धेय कृष्णमोहन अग्रवाल जी से मेरा परिचय सत्तर के दशक से रहा है, जब इलाहाबाद से उत्तरप्रदेश का सर्वाधिक सम्मानित हिन्दी-दैनिक समाचारपत्र ‘अमृत प्रभात’ का प्रकाशन (वर्ष १९७७) होता था और तब ‘पत्रकार-पण्डित’ स्मृति-शेष समादरणीय सत्यनारायण जायसवाल जी सम्पादक थे।
मैं यदि उन संस्मरणों को यहाँ प्रस्तुत करने लगूँगा तो एक ‘महाकृति’ का विग्रह प्रकट हो जायेगा। इस कृति में आदरणीय अग्रवाल जी ने ‘अपने मन की बात’ प्रस्तुत करते हुए, ‘मर्म’ का भी संस्पर्श किया है। इस प्रणेता ने इस तथ्य को भी विधिवत् रेखांकित किया है, पत्रकारिता : तब और अब’। उन्होंने इसके अन्तर्गत पत्रकारीय चरित्र को उद्घाटित करने के लिए समकालीन पत्रकारों के ‘खट्टी-मीठे’ स्वभाव का भी चित्रण किया है। मेरे लिए सुखद विषय यह है कि प्रतिपाद्य कृति में जितने भी पात्रों का जिस भी रूप में चरित्र-चित्रण किया गया है, उनमें से लगभग सभी के साथ मेरा सारस्वत सम्बन्ध भी रहा है।
मैं इस प्रभावक संस्मरण-लेखन और इस अत्युपयोगी कृति को हस्तगत कराने हेतु इसके कुशल कृतिकार सम्मान्य कृष्णकुमार अग्रवाल जी की सदाशयता के प्रति नमित हूँ।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १६ नवम्बर, २०२१ ईसवी।