‘मुक्त मीडिया’ का आज का सम्पादकीय
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

सुनियोजित ढंग से कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है। किस विषय को किस रूप में प्राथमिकता दी जाये, इस पर सुनियोजित ढंग से विचार ही नहीं किया है। यही कारण है कि अब तक के सभी क्रियान्वयन पक्ष अपरिपक्व मस्तिष्क की देन के रूप में रेखांकित हो रहे हैं।
खेद है, केन्द्र-सरकार ‘लॉक-डाउन’ के नाम जनसामान्य को अभाव की चक्की में पीसती रही; परन्तु जब उसे एहसास हुआ कि ख़ज़ाना ख़ाली हो जायेगा तब उसने अपने ही आदेश ‘लॉक-डाउन’ की ऐसी-तैसी करा दी है। सबसे पहले देश के शराबियों पर मेहरबान हो गयी; फिर क्या था, सरकार ने शराब की क़ीमतों में मनचाहा दाम बढ़ाकर अपनी आर्थिक भूख मिटा ली है। वहीं पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में बढ़ोतरी कर महँगाई के दुष्चक्र में पीसती रही। सरकार की झोली भरती रहे, ‘लॉक-डाउन’ तो सीधी-सादी जनता के लिए बना हुआ है, जो अपने संस्कार से बँधकर सरकार के साथ क़दमताल करने के लिए कृतसंकल्प हैं; परन्तु उनके अभावग्रस्त जीवन से सरकार का कोई सरोकार नहीं रहा है। सरकार जानती है कि वह जनता उसके प्रति वफ़ादार है।
अब रेलगाड़ियों की बारी है। उसे जाना होता है उत्तरप्रदेश तो पहुँच जाती है महाराष्ट्र। भांग की दुकाने भी बन्द हैं, फिर रेलगाड़ी-चालकों के मन-प्राण पर यह कैसा उन्माद! इतना ही नहीं, विमान-प्रबन्धन की भी विचित्र स्थिति है। यात्री टिकट लेकर हवाई अड्डा पहुँच आते हैं; पॉयलट, क्रू मेम्बर आदिक अपनी पूरी तैयारी किये बैठे रहते हैं, अकस्मात् मोबाइल फ़ोनों पर सूचना पहुँच आती है– अमुक-अमुक विमानों को निरस्त कर दिया गया है। उस पर आश्चर्य का विषय यह कि हवाई अड्डे पर सुस्पष्ट दिखाया जा रहा है कि जिन विमानों को निरस्त किया जाना मोबाइल फ़ोनों पर दिखाया जा रहा है, उनकी उड़ान भरने का समय अमुक है। ऐसे में, यात्रीगण प्रतीक्षारत हैं, जबकि सच्चाई यह है कि कथित विमानों को निरस्त किया जा चुका है। अब बताइए, इन समस्त विसंगतियों के लिए दोषी कौन है?
“बुभुक्षित: किं न करोति पापं।”अर्थात् भूखा व्यक्ति कौन-सा पाप नहीं करता। रेलगाड़ी में भूखे श्रमिक जब भोजन का भण्डार देख रहे हैं; पेयजल की बोतलें देख रहे हैं, आक्रान्ता की भाँति टूट पड़ रहे हैं। यह विषय अलग है कि उनके कृत्य आपराधिक हैं।
ऐसे में, सरकारों को मानवीयता की हत्या करना शोभा नहीं देता। बेशक, वे अभावग्रस्त और हालात के मारे हैं। परिस्थितियों की मार से उनके घायल वुजुद पर सत्यनिष्ठ आश्वासन की औषध लगाने की आवश्यकता है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २६ मई, २०२० ईसवी)