झुण्ड नहीं समाज बनाओ

जीवों में पशुता सरल है।
मनुष्य भी एक जीव है, मछली जैसा।
तो मछुवारे धूर्त लोग इस जीव का शिकार करने को अनेक रंग-रूप के जाल बिछाते हैं जिसमें मछलियों का झुंड आकर्षित होकर फसते रहता है।
वे फंसी हुई मछलियां उनकी फॉलोवर नही बल्कि शिकार होती हैं।
आज के कुत्सित राजनेता और समाजसेवी साधू, सेठ और अपराधी लोग ऐसे ही शिकारी हैं जो सर्वहितकारी सत्य को त्याग कर अनेक रंग-रूप के जाल बिछाकर अपना जनाधार बनाते और उनके न्यायशील जनाधिकारों को छीनकर अपना उल्लू साधते हैं।
ऐसे हर शिकारी के पीछे फंसा हुआ मछलियों का झुंड उनकी धूर्तता का शिकार बना रहता है।
इन झुंडों में फंसी हुई कुछ अधिक चालाक मछलियां उन शिकारियों का साथ भी देने लगती हैं।
तब वह और अधिक शिकार करने में सफल होता है।

चारों जनाधिकार (शिक्षा-रोजगार-सुविधा-संरक्षण) जब तक प्रति नागरिक आधार पर सरकारी राजकोष या समाजकोष द्वारा सुलभ नहीं होगा ये शिकार और शिकारी का सम्बन्ध बना रहेगा, मूर्ख और धूर्त का खेल चलता रहेगा।

जनहित व जनाधिकार को लूटना ही इन धूर्तों का एकमात्र उद्देश्य होता है।

आमआदमीपार्टी की केजरीवाल सरकार द्वारा संचालित न्यायशील चारों जनाधिकारों का दिल्ली विकास मॉडल सम्पूर्ण भारतीय समाज में प्रतिष्ठित होते ही इन धूर्तों का मकड़जाल स्वतः टूट जाएगा, तब ये शिकारी और शिकार दोनो ही सामान्य ढंग से न्यायपूर्वक रहने लगेंगे।

वरना हर राजनेता, समाजसेवी, सेठ और अपराधी निरंतर हजारों करोड़ की दौलत हथियाने को आतुर हुआ दौड़ता रहेगा इस घाट से उस घाट और बुनता-बिछाता रहेगा मकड़जाल अपनी मायावी शक्तियों से, मक्कारी से, धूर्तता से, बल से, दल से, छल से।
और शिकार होती रहेगी जनता कदम दर कदम।
समाज या राष्ट्र में जहाँ सत्यात्मक न्याय का धर्म नहीं वहां जाल है, झुंड है, शिकारी है, शिकार है। सत्यात्मक न्याय के बिना मानवी समाज का उदय नहीं होगा केवल पशुओं के झुंड ही बनते रहेंगे।

आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी सार्वजनिक रूप से नारकीय यातनाओं को झेल रहा समाज अब सकारात्मक राजनीति को स्वीकार करे व धूर्त कुराजनीति व उनके कुराजनेताओं का त्याग करे।

न्यायशील समाज बनाओ ..!
आमआदमीपार्टी को लाओ ..!!

राम गुप्ता
(स्वतंत्र पत्रकार)
अति साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आमआदमीपार्टी, उत्तरप्रदेश