“गूँज कलम की” साहित्य मंच पर हुई आशुलेखन प्रतियोगिता


पटना:-” गूंज कलम की ” राष्ट्रीय साहित्य संस्था,बिहार के मुख्य मंच के व्हाट्स अप समूह पर गत 17 जुलाई की रात्रि को 9 बजे से 10 बजे तक आशु लेखन काव्य प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।

मुख्य संचालिका सुशी सक्सेना इंदौर मध्यप्रदेश के द्वारा दिए गए विषय ” शब्द ” पर काव्य लेखन कार्य किया गया। यह आयोजन लगातार 1 घंटे तक चला। इस आयोजन में मंच पर संस्था अध्यक्ष डॉ. स्नेहलता द्विवेदी पटना, (बिहार) से, समूह प्रभारी कृष्ण चतुर्वेदी, बूंदी (राजस्थान) से और मंच के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी डॉ. राजेश कुमार शर्मा, भवानी मंडी (झालवाड़) राजस्थान से उपस्थित रहे।

मुख्य संचालिका सुशी सक्सेना (इंदौर, मप्र) ने बताया कि प्रतिभागी रचनाकारों में रीता खरे (मुंबई), जुगल किशोर पुरोहित (बीकानेर,राज.), नीति गुप्ता लुधियाना (पंजाब), डाॅ.कवि कुमार निर्मल (बेतिया,बिहार), प्रोफेसर शरद नारायण खरे(मंडला,मप्र),सरोज कंवर शेखावत(जयपुर,राज.),शकुंतला श्रीवास्तव (भोपाल, मप्र), आशा बैजल(ग्वालियर, मप्र), डौली झा (इंदौर, मप्र), वंदना सिंह, (वाराणसी,उप्र), महेन्द्र राज चौहान(अजमेर).डाॅ.नीलम (अजमेर), पुष्पा निर्मल (बेतिया, बिहार)डाॅ.सीमा शाह( झाबुआ, मप्र) नीलम व्यास(जोधपुर) रमा खरे(बांदा,उप्र), हेमलता भारद्वाज,(इंदौर)से उपस्थित थे। कवियों/कवयित्रियों द्वारा लगातार एक घंटे तक प्रदत्त विषय ” शब्द ” पर काव्य लेखन किया गया।

आयोजन के आरंभ में जुगल किशोर पुरोहित जी ने अपनी कविता….
” शब्द ही तो मूल हैं, शब्द काव्य का आधार।
शब्द की महिमा बड़ी, शब्द गीत का आधार। “
के माध्यम से शब्दों की महिमा का व्याख्यान किया। मंच पर उपस्थित प्रोफेसर शरद नारायण खरे ने,
” शब्द – शब्द है चेतना, शब्द शब्द श्रृंगार।
मिले श्रृष्टि को जागरण, शब्द रचे आकार। “
रचना लिख कर वाह-वाही बटोरी। मुख्य संचालिका सुशी सक्सेना ने अपनी कविता……………
” दिल में आता है कि लफ्ज़ बन जाऊं।
कागज़ की ठंडी रेत पर बिखर जाऊं।
भीगे भीगे से लफ्ज़ दिल छू लेते हैं,
मैं भी किसी के दिल में उतर जाऊं” के द्वारा अपने दिल की भावनाओं को व्यक्त किया। डॉली झा इंदौर ने, “
शब्द शिशु है, भावना का,
भाव जैसे हों, शब्द वैसे ही आकार ले लेते हैं। “
लिख कर शब्दों के व्यवहार को परिभाषित किया।
आयोजन में नीति गुप्ता ने, ” शब्दों को जोड़ कर ” , आशा बैजल ने, ” भाषा के मेले में शब्दों की दुकान ” , सरोज कंवर शेखावत ने, ” लफ्ज़ कुछ खास कहते हैं, ” , डाॅ. कवि कुमार निर्मल ने, ” एक ख्याल पुराना ” , वंदना सिंह जी ने, ” कुछ शब्द चुने थे “, राज चौहान ने, ” मैं रोज लफ़्ज़ों से ” , पुष्पा निर्मल ने, ” माया के रचे शब्द ” के साथ सीमा शाह जी ने, ” शब्दों का संसार ” आदि रचनाएं लिखीं।सभी शानदार और सराहनीय रचनाएं रहीं।
अंत में समूह प्रभारी कृष्ण चतुर्वेदी ने…………..

शब्दों के बिना…. प्यार अधूरा है।
शब्दों के बिना…. संसार अधूरा है।
शब्द सहचर हैं, समय के साथियों।
शब्दों के बिना…. काव्य अधूरा है।”

अपनी बेशकीमती रचना पढ़ते हुए सभी रचनाकारों को धन्यवाद ज्ञापित किया और आयोजन का समापन किया।