● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
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देश को स्वतन्त्रता प्राप्त होने के पश्चात् ‘मीडिया-जगत्’ मे ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी राजनैतिक दल की सरकार ने अपनी ओर से यह मार्गदर्शिका निर्धारित कर दी है कि समाचारपत्र- पत्रिकाओँ एवं चैनलोँ को क्या लिखना-छापना तथा प्रसारण करना है और क्या नहीँ। सरकार की ओर से ७० ‘स्टोरी’ निर्धारित कर दी गयी हैँ, जिनसे हटकर समाचारपत्र-पत्रिकाएँ, चैनल इत्यादिक बिलकुल नहीँ दिखा सकते। उदाहरण के लिए– किसी पत्रकार की आँखोँ के सामने कोई कुव्यवस्था आ जाती हो तो उसे नज़रअन्दाज़ करना ही होगा, अन्यथा की स्थिति मे योगी-सरकार कोई काररवाई करा सकती है।
उत्तरप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की योगी-सरकार ने सम्पादकोँ के पास कथित ‘महाकुम्भ’ के विषय मे क्या छापना है और क्या नहीँ, इसके लिए सारे विषय निर्धारित करके ३८ पृष्ठोँ की एक मार्गदर्शिका प्रेषित कर दी है, जिसमे यह सुस्पष्ट तरीक़े से लिखा हुआ है कि पत्रकार यह भी लिखेँ– यह कुम्भ अन्य कुम्भ की तुलना मे विशेष कैसे है। पत्रकार यह भी बताये– कुम्भ मेला की सफलता का श्रेय उत्तरप्रदेश की सरकार को कैसे दिया जाये? पत्रकार किस अधिकारी से मिलेगा; किस साधु-संत, मण्डलेश्वर इत्यादिक से मिलकर किस प्रकार के प्रश्न करेगा, यह सब पूर्व-निर्धारित कर दिया गया है।
ऐसे मे, ‘पेड न्यूज़’ का चरित्र खुलकर सामने आ चुका है। ‘महाकुम्भ’ के प्रचार-प्रसार के लिए सरकारी ख़ज़ाना खोल दिया गया है तथा किसको कितना दिया जायेगा तथा दिया जा चुका है, यह अन्वेषण-पत्रकारिता का विषय है। निर्धारित विषयोँ मे से किन-किन विषयोँ पर पत्रकारोँ ने प्रकाशनार्थ-प्रसारणार्थ सामग्री दिये गये निर्देश के अनुसार तैयार कर ली है, इसके बताने के लिए दिये गये विषयोँ पर ‘टिक्’ भी लगानी होगी।
उक्त मार्गदर्शिका एक प्रकार से पत्रकारोँ के लिए ‘धमकी’ भी है; क्योँकि उत्तरप्रदेश के सूचना-निदेशक/अधिकारी की नज़रेँ हर ख़बर पर बनी रहेगी। दिशानिर्देशिका की अवहेलना करते ही सम्बन्धित समाचारपत्र एवं समाचार-चैनल-प्रतिष्ठानो के विरुद्ध योगी की भृकुटि टेढ़ी होनी तै/तय है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १० जनवरी, २०२५ ईसवी।)