‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज के तत्त्वावधान मे आज (९ जनवरी) ‘विश्व हिन्दी-दिवस’ की पूर्व-संध्या मे ‘सारस्वत सदन’, अलोपीबाग़, प्रयागराज से ‘हिन्दी की वैश्विक स्थिति’ विषयक एक आन्तर्जालिक अन्तरराष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन किया गया।

समारोह मे एस० जे० एस० यू०, संयुक्त राज्य अमेरिका की विज़िटिंग स्कॉलर डॉ० नीलम जैन अध्यक्ष रहीँ। क्वान्ग्तोंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, चीन मे हिन्दी के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ० विवेकमणि त्रिपाठी मुख्य अतिथि थे। यशवन्तराव चह्वाण वारणा महाविद्यालय, वारणानगर, कोल्हापुर, महाराष्ट्र के हिन्दी-विभागाध्यक्ष डॉ० प्रकाश शंकरराव चिकुर्डेकर विशिष्ट अतिथि थे। आकाशवाणी, पूर्वोत्तर सेवा, शिलांग, मेघालय की उद्घोषिका नीता शर्मा, आगरा कॉलेज, आगरा मे अँगरेज़ी के सहायक प्राध्यापक डॉ० अमरेशबाबू यादव इत्यादिक की वक्ता के रूप मे प्रभावमयी सहभागिता रही। बौद्धिक परिसंवाद का संयोजन और संचालन भाषाविज्ञानी एवं समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने किया था।
डॉ० विवेकमणि त्रिपाठी एसोसिएट प्रोफेसर (हिन्दी ) क्वान्ग्तोंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, चीन ने बताया, "चीन मे हिन्दी का इतिहास आठ दशक का है; परन्तु पिछले दो दशक मे चीन मे हिन्दी- अध्यापन मे अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिली है I वर्तमान मे, चीन के अठारह विश्वविद्यालयोँ मे हिन्दीभाषा स्नातक स्तर पर तथा तीन विश्वविद्यालयोँ मे स्नातकोत्तर एवं पीएच्०डी०- स्तर पर पढ़ाई जा रही है I अभी चीन मे प्रतिवर्ष पाँच सौ से अधिक शोधपत्र हिन्दी मे लिखे जा रहे हैँ। वहाँ हिन्दीअनुवाद-कार्य भी व्यापक स्तर पर किये जा रहे हैँ I चीनी बाज़ार मे भी हिन्दी की माँग बनी हुई है, जिसके कारण चीन मे हिन्दी पढ़नेवाले विद्यार्थियों की संख्या मे अतीव वृद्धि हो रही है।"
डॉ० नीलम जैन, हिन्दी-विज़िटिंग स्कॉलर एस० जे० एस० यु० संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा, "हिन्दी संयुक्त राज्य अमेरिका मे बोले जानेवाली प्रमुख भाषाओँ मे से एक है अनेक आर्गेनाइजेशन रविवारीय हिन्दी-स्कूल चलाते हैँ; अनेक विश्वविद्यालयोँ मे हिन्दी के कोर्स चलते हैँ तथा हिन्दी-साहित्यिक संस्थाएँ कार्यरत हैँ। वहाँ की सरकार की नीति उदार है। ऑन एअर जैसे आकाशवाणी-केन्द्र हिन्दी के प्रोग्राम रखते हैँ तथा प्रतियोगिताएँ आयोजित होती हैँ; हिन्दी-सिनेमा चलते हैँ तथा हिन्दी कवि सम्मेलन होते रहते हैँ।"
प्रभारी प्रधानाचार्य एवं प्रो० प्रकाश शंकरराव चिकुर्डेकर हिन्दीविभागाध्यक्ष यशवन्तराव चह्वाण वारणा महाविद्यालय, कोल्हापुर (महाराष्ट्र) ने कहा, "अपने देश के प्रबुद्धजन विदेश मे लेखक, पत्रकार, अध्यापक, सांस्कृतिक समन्वयक आदि के रूप मे हिन्दी-सेवा करते आ रहे हैँ, साथ ही आप्रवासी भारतीय साहित्यकार हिन्दी का प्रचार-प्रसार विविध माध्यमो मे कर रहे हैँ।''
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आयोजक-संचालक एवं भाषाविज्ञानी, प्रयागराज ने कहा, "हम भारतीय भूल जाते हैँ कि जब भी कोई विस्तार होता है तब वह अपने पूरे अनुशासन के साथ नहीँ हो पाता। यही कारण है कि हिन्दी के वैश्विक विस्तार के समय उसके शुचिता-पक्ष पर जितना ध्यान केन्द्रित किया जाना चाहिए था, उतना नहीँ किया गया, जिसका परिणाम और प्रभाव भी हमारे सामने है– आज विश्व मे हिन्दी की जितनी भी समाचारपत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित की जा रही हैँ, उनमे सामान्य स्तर की अशुद्धियाँ व्याप्त रहती हैँ। हिन्दीसेवियोँ को इस ओर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित करना होगा।''
आगरा कॉलेज, आगरा मे अँगरेज़ी-विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ० अमरेशबाबू यादव का मानना है, "वैश्वीकरण एवं बाज़ारवाद के आधुनिक दौर मे हिन्दी का महत्त्व दिनोदिन बढ़ता जा रहा है। आज भारत के बाहर नेपाल, भूटान, सिंगापुर, मलेशिया, थाइलैण्ड, हांगकांग, फीजी, मॉरीशस, ट्रिनीडाड, गयाना, सूरीनाम इत्यादि देशोँ मे हिन्दीभाषी बहु बड़ी संख्या मे हैँ। दुनिया के १७५ देशों मे हिन्दी के शिक्षण-प्रशिक्षण के अनेक केन्द्र बनाये गये हैं। आज हिन्दी १२ से अधिक देशोँ मे बहुसंख्यक समाज की मुख्य भाषा है।''
नीता शर्मा हिन्दी-उद्घोषिका पूर्वोत्तर-सेवा, शिलांग (मेघालय) ने बताया, "आज हिन्दी पूरी दुनिया मे सिर्फ़ बोल-चाल और सम्पर्क की भाषा नहीँ है, बल्कि वह इण्टरनेट, ह्वाट्सऐप्प तथा ई० मेल की बनती जा रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा-जैसे देशोँ मे हिन्दी-भाषा की उन्नति और विकास पर संसद मे अलग से बजट तैयार किया जाता है। विदेश मे हिन्दी-भाषा को जाननेवाले भारतीय लोग बच्चोँ को साप्ताहिक छुट्टी के दिन निश्शुल्क हिन्दी-कक्षाएँ आयोजित कर, हिन्दी सिखाकर उन्हें शिक्षित और जागरूक करते हैँ।''