‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ की ओर से २ अगस्त, २०१८ ईसवी को कटरा, इलाहाबाद में तीन चरणों में एक सारस्वत समारोह आयोजित किया गया था। समारोह का उद्घाटन दीपप्रज्वलन कर किया गया था, तत्पश्चात् रसराज अवनेन्द्र पाण्डेय ने वेदपाठ किया। प्रथम चरण के अन्तर्गत ‘गोस्वामी तुलसी दास और ज्योतिष’ का लोकार्पण समारोह के अध्यक्ष भाषाविद् डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, मुख्य अतिथि कवि देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ‘देवेश’ तथा विशिष्ट अतिथि गीतकार मुनीन्द्र श्रीवास्तव ने किया।
द्वितीय चरण के अन्तर्गत ‘सुरेशचन्द्र श्रीवास्तव और उनका रचना-संसार’ विषयक बौद्धिक परिसंवाद पर विद्वज्जन ने अपने विचार प्रकट किये थे।
अध्यक्षीय विचार व्यक्त करते हुए, डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कहा– डॉ० सुरेशचन्द्र श्रीवास्तव की आचरण की सभ्यता उन्नत शिखर पर थी। उनकी रचना में विचारजीविता वर्तमान लक्षित होती है।
संचालक डॉ० प्रदीप चित्रांशी ने बताया– सुरेश जी की रचनाओं में सदैव दूसरों के दु:ख को आत्मसात कर, उन्हें सुख की अनुभूति कराने का भाव प्रतिबिम्बित होता है। सुरेश जी मेरे पथप्रदर्शक थे। वेदप्रकाश पाण्डेय ने कहा— सुरेश जी “सादा जीवन-उच्च विचार’ की जीवन्त प्रतिमूर्ति थे।
सुरेश जी की पुत्री शुभारानी श्रीवास्तव ने बताया, “पापा जी हम लोग से कविता में ही संवाद करते थे।”
पौत्री जयश्री और राजश्री ने कहा, “बाबा का व्यक्तित्व आत्मीयता से भरपूर था। उनकी रचनाशीलता में समाज का दर्द झलकता है।
डॉ० रवि मिश्र ने कहा— वे ऐसे व्यक्ति थे, जो एक जगह बैठकर अपनी दुनिया को रचा करते थे। उनके भीतर एक भावुक व्यक्ति बैठा होता था।
सुनील मिश्र ने बताया– सुरेश जी की रचनाओं में पर्यावरण के प्रति गहन संवेदना दिखती है।
तृतीय और अन्तिम चरण में डॉ० सुरेशचन्द्र श्रीवास्तव को समर्पित एक कवि-सम्मेलन हुआ, जिसमें उनकी पत्नी पुष्पा देवी श्रीवास्तव ने एक भजन सुनाया।
इस अवसर पर तलब जौनपुरी, मुनेन्द्र श्रीवास्तव, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ‘देवेश’, रसराज अवनेन्द्र पाण्डेय, कैलाश पाण्डेय, डॉ० वीरेन्द्र तिवारी, शिवराम उपाध्याय, पीयूष मिश्र, उमा सहाय, एस०पी०श्रीवास्तव, केशव सक्सेना, जयशंकर मिश्र, उमेश श्रीवास्तव, नज़र इलाहाबादी आदिक ने काव्यपाठ किये।
इनके अतिरिक्त नीतारानी सिंह, प्रवीशचन्द्र श्रीवास्तव, डॉ० अरविन्द कुमार मिश्र, श्यामनारायण मिश्र आदिक की उपस्थिति रही।
समारोह का संयोजन अंशुमान सिंह ने किया।