दिल की धड़कन मिली और दिल भा गया : पवन कश्यप (हरदोई)

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युवा गीतकार पवन कश्यप (हरदोई)

मुद्दतों से जिसे खोजता मैं रहा,
स्वप्न मे था अभी तक वो दिन आ गया ।
तुमसे मिलकर लगा मिल गया ये जहाँ,
दिल की धड़कन मिली और दिल भा गया ।
तुमने देखा मुझे देखता मैं रहा,
दिल के जज्बातों को शब्द दे न सका ।
मन मे उन्माद यूँ ही उमड़ते रहे,
खो गये इस कदर लफ़्ज दे न सका ।
चाहतों के भ्रमर गुनगुनाने लगे,
पास मे ही कोई पुष्प खिल सा गया ।
तुमसे मिलकर लगा मिल गया ये जहां,
दिल की धड़कन मिली और दिल भा गया ।
सूखे नयनों में हलचल हुई इस तरह,
बाढ सी आ गई इस मुलाकात से ।
कर लिया तुमने अपने हवाले हमें,
मैं निखरने लगा इस सौगात से।
ये बदन आपका लगता पारस सरिस,
तुमको छूकर के मानो चमक सा गया।
तुमसे मिलकर लगा मिल गया ये जहां,
दिल की धड़कन मिली और दिल भा गया ।
गिर गया मैं धरा पर सुनके आवाज ये,
जब जाने को हम से विदा माँग ली ।
चैन खोया मेरा मैं तो बेसुध हुआ,
एक क्षण को लगा तुमने जो मॅँग ली ।
तेरे जाने से बरसात होने लगी,
मानो बादल भी गमगीन सा हो गया ।
दिल की धड़कन मिली और दिल भा गया ।
मुद्दतों से जिसे खोजता मै रहा,
स्वप्न मे था अभी तक वो दिन आ गया ।
तुमसे मिलकर लगा मिल गया ये जहां,
दिल की धड़कन मिली और दिल भा गया ।